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14-05-2021
मेडिकल कारोबारी से 6 लाख 80 हजार की ठगी, नहीं दर्ज हुई एफआईआर 

रायपुर। राजधानी के एक मेडिकल कारोबारी को सूरत के कारोबारी ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और डेड बाडी बेड की सप्लाई करने का झांसा देकर 6.80 लाख रुपए ठग लिया है। ठगी के शिकार पंकज जैन ने माना कैंप पुलिस थाने में इसकी शिकायत की है। फिलहाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं किया है। जांच के बाद कार्रवाई करने की जानकारी थाना प्रभारी ने दी है। मिली जानकारी के मुताबिक डूमरतराई स्थित औषधि वाटिका मेडिकल काम्पलेक्स में शाप नंबर 167 में पंकज जैन की डायमंड एजेंसी के नाम से फर्म है। यह फर्म मेडिकल उपकरणों, दवाइयों की खरीद-बिक्री का काम करती है। पंकज जैन ने बताया कि इंडिया मार्ट के माध्यम से सूरत की आदिनाथ डिस्पोजल नामक फर्म ने संपर्क कर मेडिकल सामान की उपलब्धता बताकर आर्डर करने को कहा। पंकज ने फर्म पर भरोसा कर 16 अप्रैल को डेड बाडी बेड और रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई करने का आर्डर देते हुए फर्म के बताए गए बैंक खाते में दो बार में कुल 6 लाख 80 हजार 400 रुपए का भुगतान कर दिया। पैसे मिलने के बाद आदिनाथ फर्म के संचालक कौशल बोरा ने जल्द सामान की आपूर्ति करने का आश्वासन दिया। लेकिन अभी तक सामान की डिलीवरी नहीं की। फोन करने पर रीसिव भी नहीं किया। बाद में फोन भी स्वीच ऑफ हो गया। फोन बंद होते ही ठगी की आशंका पर पंकज जैन ने थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच चल रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

08-05-2021
रेखचन्द जैन ने बस्तर प्रशासन को सौंपे 150 रेमडेसिविर इंजेक्शन और 1 लाख अधिक राशि का चेक

जगदलपुर। संसदीय सचिव एवं जगदलपुर विधायक रेखचन्द जैन ने बस्तर कलेक्टर रजत बंसल को जिले में कोविड 19 संक्रमण के रोकथाम एवं नियंत्रण व उपचार के लिए 150 नग रेमडेसिविर इंजेक्शन और 1 लाख 7 हजार 800 रुपये का चेक प्रदान किया। कलेक्टर रजत बंसल ने बस्तर जिला प्रशासन की ओर से संसदीय सचिव रेखचन्द जैन के प्रति इसके लिए आभार व्यक्त किया।

 

30-04-2021
रायपुर में फिर रेमडेसिविर की कालाबाजारी करते युवक गिरफ्तार, साइबर सेल की टीम ने पकड़ा रंगे हाथ

रायपुर। राजधानी रायपुर में शुक्रवार को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। साइबर सेल की टीम ने युवक को रंगे हाथ पकड़ा है। युवक के कब्जे से 2 रेमडेसिविर इंजेक्शन और 20 रुपए जब्त किए गए हैं। औषधि विभाग की टीम ने आरोपी के खिलाफ औषधि अधिनियम और थाना न्यू राजेन्द्र नगर पुलिस ने प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की है।  पुलिस के मुताबिक आरोपी चंद्र कुमार जांगड़े ( 23वर्ष)ग्राम कुरू थाना राखी रायपुर का रहने वाला है। सूचना मिली थी कि चंद्र कुमार जांगड़े रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहा है। एसएसपी के निर्देश पर साइबर सेल टीम का एक सदस्य ग्राहक बनकर चंद्र कुमार जांगड़े से संपर्क किया।  रेमडेसिविर इंजेक्शन को 17 हजार रुपए में खरीदने का सौदा तय हुआ। चंद्र कुमार जांगड़े ने टीम के सदस्य को थाना न्यू राजेन्द्र नगर क्षेत्र में इंजेक्शन देने के लिए बुलाया। साइबर सेल की टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए  ट्रैप पार्टी लगाई थी। तय अनुसार टीम का सदस्य  रुपए लेकर चंद्र कुमार जांगड़े से इंजेक्शन खरीदने पहुंचा। इस दौरान टीम के अन्य सदस्यों ने आरोपी चंद्र कुमार जांगड़े को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते रंगे हाथ पकड़ा। साइबर से  की टीम ने औषधि विभाग की टीम को बुलाकर आरोपी से रेमडेसिविर और रुपए बरामद किए।

30-04-2021
कन्हैया अग्रवाल ने कहा- छत्तीसगढ़ में रेमडेसिविर की खरीदी का 30 दिन का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए 

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सप्लाई चेन को बेनकाब करने के लिए रेमडेसिविर की छत्तीसगढ़ में आने वाली एक महीने की खेप का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग पुलिस प्रशासन और ड्रग कंट्रोलर से की है। उन्होंने कहा है कि कालाबाजारी के लिए इंजेक्शन कहां से आया यह जानने के लिए रेमडेसिविर के जितने स्टॉकिस्ट हैं उनसे 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक की खरीदी बिक्री का पूरा ब्यौरा( बिल -- रिसीविंग ) लेकर उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए । जब इंजेक्शन अस्पताल से बाहर सप्लाई नहीं हो सकते तो मार्केट में ब्लैक में कैसे उपलब्ध हो रहे हैं। अफसरों और राजनीतिक दलों के नेताओं के पास कैसे पहुंच रहे हैं ? उन्होंने कहा है कि पुलिस विभाग और ड्रग विभाग को जांच और कार्रवाई तुरंत करनी चाहिए। कौन है जो जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी करने वालों को इंजेक्शन उपलब्ध करा रहा है। और कौन हैं जो ऐसे जघन्य कृत्य को संरक्षण दे रहा है ? ऐसे दोनों प्रकार के लोगों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि इंजेक्शन के लिए गांव से लेकर देश की सरकार, जिला से लेकर उच्चतम न्यायालय गंभीर प्रयास कर रहे हैं। इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों को इंजेक्शन सप्लाई करने वाले और उनके संरक्षणकर्ताओं का 5 दिन बाद भी बेनकाब नहीं होना दुर्भाग्यजनक है।  इंजेक्शन में प्रिंट बैच नंबर के आधार पर समस्त जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकती है।

29-04-2021
Video: सरकारी डाक्टर रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचते रंगेहाथ पकड़ाया, 15 हजार में बेच रहा था एक इंजेक्शन

महासमुन्द। जिला अस्पताल का सरकारी डाक्टर अवैध रूप से रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचते रंगे हाथ पकड़ा गया।  पुलिस ने जिला अस्पताल के इस डाक्टर को संदेह के आधार पर गिरफ्तार कर भादवि की धारा 102 की कार्रवाई कर मामले को ड्रग्स एंड फूड विभाग को मामला सौंप दिया है। महासमुन्द जिले में यह पहला मामला सामने आया है, जहां सरकारी अस्पताल का डाक्टर पीडि़त परिवार से 34 सौ के इंजेक्शन को 15 हजार में बेचता पाया गया है। पुलिस ने बताया है कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि जिला अस्पताल का डॉं. दैत्यनाशन पटेल कुछ लोगों को रेमडेसिविर अवैध रूप से बेच रहा है। पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने सूचना पाकर सिटी कोतवाली पुलिस और साइबर सेल को आरोपी डाक्टर को रंगेहाथ गिरफ्तार करने के लिए लगा दिया। पुलिस ने आरोपी डाक्टर को राजिम मोड़ के पास रेमडेसिविर बेचते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया।  आरोपी को इंजेक्शन बेचने के संदेह में गिरफ्तार कर मामले फूड एंड ड्रग्स विभाग को आगे की जांच के लिए सौंपा दिया है।
कुछ दिनों पहले बागबाहरा निवासी विशाल राय के दादा-दादी कोरोना से पीडि़त हो गये, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डाक्टरों की सलाह पर पीडि़त परिवार को रेमडेसिविर की इंजेक्शन लेने कहा गया था। पीड़ि़त परिवार ने अपने दादा-दादी की जान बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की तलाश करने लगे। तब उन्हें किसी ने जानकारी दी कि जिला अस्पताल का डाक्टर दैत्यनाशन पटेल अवैधानिक तरीके से इंजेशन बेच रहा है। तब पीडि़त परिवार ने आरोपी डाक्टर से सम्पर्क किया। पहले खेप में पीडि़त परिवार ने आरोपी डाक्टर से 6 इंजेक्शन 90 हजार रुपए में खरीदा। एक इंजेक्शन को आरोपी डाक्टर ने 15 हजार रुपए के दाम पर बेचा था। रेमडेसिविर इंजेक्शन की अगर प्रिंट रेट देखे तो उसकी कीमत 34 सौ रुपए लिखा हुआ है। पहली खेप में रेमडेसिविर लेने के बाद पीडि़त परिवार को अपने दादा-दादी के लिए फिर से रेमडेसिविर की इंजेक्शन की जरूरत पड़ी, तब पीडि़त परिवार ने आरोपी डाक्टर पटेल से सम्पर्क कर निवेदन किया कि उनकी माली हालात ठीक नहीं है और इंजेक्शन को कम दाम पर उन्हें बेच दे। लेकिन डाक्टर 15 हजार प्रति इंजेक्शन से एक रूपए भी कम लेने से मना कर दिया। पीडि़त परिवार को डाक्टर से रवैय्ये से दुख हुआ और वह अपनी समस्या लेकर महासमुन्द के एक नेता के पास पहुंचे। पीडि़त परिवार की समस्या सुनकर नेता ने मामले की जानकारी अपने बड़े नेता को दी और इसके बाद इन्हीं नेताओं ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद आरोपी डाक्टर दैत्यनाशन पटेल को फोन किया गया। तब आरोपी डाक्टर ने उन्हें राजिम मोड़ महासमुन्द पर आने के लिए कहा। पुलिस पहले से ही वहां नजर जमाई हुई थी। जैसे ही आरोपी डाक्टर मौके पर पहुंच कर अवैधानिक तरीके से रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने लगा उसी वक्त उसे सिटी कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की टीम ने 6 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी डाक्टर पर क्या कार्रवाई जिला अस्पताल ने की यह जानकारी अभी नहीं मिल पाई है।

 

29-04-2021
पानी वाला इंजेक्शन लगाकर महंगे दामों में बेच देते थे रेमडेसिविर, गिरफ्तारी के बाद पता चला चारों पॉजिटिव

मुरादाबाद/रायपुर। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर मरीजों को पानी चढ़ाने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बता दें कि मामला मुरादाबाद का है। यहां अस्पताल में भर्ती मरीजों को रेमडेसिविर की जगह पानी चढ़ाकर स्टॉफ के चार लोग इंजेक्शन की कालाबाजारी करते थे। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने कोरोना की दूसरी लहर आते ही इंजेक्शनों को चोरी कर कालाबाजारी करना शुरू कर दिया था। 22 दिन के भीतर वे 34 इंजेक्शनों की कालाबाजारी कर चुके थे।

इंटरनेट पर सोशल में जरूररतमंद की तलाश कर आरोपी उन्हें महंगे दामों में इंजेक्शन बेचते थे। हाल ही में कांठ रोड स्थित अस्पताल में दम तोड़ने वाले एक अधिवक्ता के भी दो इंजेक्शन चोरी कर उसे 75 हजार रुपए में बेच दिए थे। बता दें कि एसएसपी प्रभाकर चौधरी के व्हाट्सएप नंबर पर आई सूचना के बाद एसपी सिटी अमित कुमार आनंद के निर्देशन में टीम गठित की गई। एसओजी प्रभारी अजय कुमार, इंस्पेक्टर मझोला मुकेश शुक्ला ने गोपनीय सूचना के बाद छापेमारी करते हुए चारों को रंगेहाथ पकड़ लिया। आरोपियों की कोरोना जांच कराने पर उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उन्हें अस्थाई जेल भेजा गया।

26-04-2021
चार हजार के रेमडेसिविर इंजेक्शन को बेच रहे थे 18 हजार में, 2 गिरफ्तार

बिलासपुर/रायपुर। कोरोना मरीजों को लगाए जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते दो युवकों को तोरवा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने युवकों से एक रेमडेसिविर का एंपुल और 53 हजार रूपए नगद जब्त किया है। पकड़े गए दोनों युवक निजी अस्पताल में काम करते हैं। पुलिस अस्पताल प्रबंधन से इस संबंध में जानकारी ले रही है। तोरवा थाना प्रभारी परिवेश तिवारी ने बताया कि रविवार दोपहर सूचना मिली कि कुछ लोग कोरोना संक्रमित मरीज के उपचार में काम आने वाली दवा रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर महंगे दाम पर बेच रहे हैं। पुलिस ने मुखबिर को खरीददार बनाकर दवा की कालाबाजारी करने वालों से संपर्क करने कहा। उसने महिमा नगर सिरगिट्टी में रहने वाले दिलीप कुमार सन्नाट (34 वर्ष) और द्वारिका सिंह (24 वर्ष) खम्हरिया थाना सीपत से संपर्क किया। युवकों ने पुलिस के मुखबिर को बंगाली चौक के पास बुलाया। इस दौरान युवकों ने दवा के लिए 18 हजार रूपए में सौदा तय किया। इसके बाद युवकों ने फोन कर मुखबिर से मरीज के संबंध में जानकारी ली और अग्रसेन चौक के पास दवा के लिए बुलाया। रविवार की शाम युवकों ने मुखबिर को दवा के लिए अग्रसेन चौक स्थित स्टार हॉस्पिटल के बाहर बुलाया। युवक दवा लेकर मुखबिर के पास पहुंचा। इसी दौरान पुलिस ने दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने आरोपित युवकों के कब्जे से एक एंपुल रेमडेसिविर इंजेक्शन का एंपुल जब्त कर लिया है। पूछताछ के दौरान पता चला कि युवकों ने चार एंपुल दवा 18 हजार की दर से बेचे है। पुलिस ने युवकों के कब्जे से 53 हजार नकद दो मोबाइल और मोटरसाइकिल जब्त की है।

 

24-04-2021
झूठ बोलने के आदी है सांसद सुनील सोनी : कांग्रेस

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भजपा सांसद सुनील सोनी के रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर दिए गए बयान को गुमराह करने वाला झूठा और भ्रामक बताया है। धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा के नेता और सांसद निरंतर कोरोना संकटकाल में झूठ फरेब की राजनीति कर रहे हैं। झूठा बयानबाजी कर जनता के बीच में पैनिक स्थिति निर्मित कर रहे हैं। सुनील सोनी गैर जिम्मेदार बयानबाजी करने के लिए जाने जाने लगे हैं। झूठ बोलेने के आदी है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्य गुजरात के सूरत म्युनिसिपल कारपोरेशन ने और मध्य प्रदेश के कमिश्नर मेडिकल कॉरपोरेशन ने भी 1568 रुपए में रेडमेसिविर इंजेक्शन की खरीदी की है। महाराष्ट्र के म्युनिसिपल कारपोरेशन मुंबई ने भी वाइल्ड लाइफ कंपनी के रेडमेसिविर इंजेक्शन को 1568 रुपए के दाम पर खरीदा है। इंजेक्शन की कीमत 1400 रुपए प्लस 168 उसमें जीएसटी अतिरिक्त है। गुजरात मेडिकल सर्विसेज ने भी दूसरी कंपनी के रेडमेसिविर इंजेक्शन को 1650 में प्लस जीएसटी अलग से दाम पर खरीदा है। आंध्र प्रदेश में भी रेडमेसिविर इंजेक्शन वाइल्ड लाइफ कंपनी की 1568 में खरीदी की गई है। ऐसे में सांसद सुनील सोनी ने राज्य सरकार पर झूठा और मनगढ़ंत आरोप लगाकर अपनी भाजपा की झूठ फरेब की राजनीतिक चरित्र को आगे किया है।

23-04-2021
कोविड अस्पतालों को शासन के निर्देशानुसार तय करना होगा दवाई का वितरण, नहीं करने पर होगी कार्रवाई

रायपुर। नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के विक्रय के संबंध में जानकारी संधारित करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश सभी सहायक औषधि नियंत्रकों/औषधि निरीक्षकों व रेमडेसिविर इंजेक्शन के समस्त सीएण्डएफ व स्टॉकिस्ट/डिस्ट्रीब्यूटरों को दिए गए हैं। जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य में कोरोना (कोविड-19) से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। राज्य में आवश्यक जीवन रक्षक औषधि रेमडेसिविर इंजेक्शन का वितरण उपलब्धता के अनुसार, समस्त प्राइवेट सेंटर/अस्पतालों में किया जा रहा है। विभिन्न समाचार माध्यमों से रेमडेसिविर इंजेक्शन के नकली व काला-बाजारी से संबंधित सूचना प्राप्त रही है।  इसे रोकने के लिए रेमडेसिविर औषधि के वितरण की जानकारी संधारित करना अति आवश्यक है। अत: सीएण्ड एफ से स्टॉकिस्ट/डिस्ट्रीब्यूटर/कोविड सेंटर को विक्रय किए गए व स्टॉकिस्ट/डिस्ट्रीब्यूटर से कोविड सेंटर/अस्पतालों को विक्रय किए गए औषधि रेमडेसिविर इंजेक्शन की जानकारी निर्धारित प्रारूप में संकलित करें। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि कोविड अस्पतालों को शासन के निर्देशानुसार औषधि का वितरण तय करना आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 एवं नियमावली 1945 के नियम 65 के प्रावधानों के तहत एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

23-04-2021
रेमडेसिविर के क्रय-विक्रय के संबंध में समस्त दस्तावेजों की देनी होगी जानकारी, निर्देश जारी 

रायपुर। नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से रेमडेसिविर इंजेक्शन के क्रय-विक्रय संबंधी दस्तावेजों के संधारण के निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य के सभी निजी कोविड सेंटरों/हॉस्पिटलों के संचालकों/नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। आदेश के मुताबिक राज्य में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन का जीवन रक्षक औषधि के रूप में उपयोग किया जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से रेमडेसिविर इंजेक्शन का वितरण उपलब्धता के अनुसार, समस्त प्राइवेट सेंटर/अस्पतालों में किया जा रहा है। विभिन्न समाचार माध्यमों से रेमडेसिविर इंजेक्शन के नकली व कालाबाजारी से संबंधित सूचना प्राप्त हो रही है।  अत: सभी निजी कोविड सेंटरों/अस्पतालों के संचालकों/नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। उन्हें आपके संस्थान की ओर से  खरीदी गई व मरीजों के उपचार के लिए उपयोग में लाए गए औषधि रेमडेसिविर इंजेक्शन की जानकारी देनी होगी। शतप्रतिशत क्रय-विक्रय संबंधी समस्त दस्तावेजों का संधारण करना होगा। यह भी निर्देशित किया गया है कि मरीजों को वितरित किए गए इंजेक्शन की खाली व्हायल आदि का मरीज के नाम के साथ संधारण करें।

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