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29-09-2020
बॉडी मास इंडेक्स में किया गया बदलाव,अब यह रहेगा महिला और पुरुषों के लिए आदर्श वजन और लंबाई...

नई दिल्ली। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन ने देश में महिला और पुरुष के लिए आदर्श वजन में थोड़ा बदलाव किया है। अब नए नियमों के मुताबिक दोनों के लिए आदर्श वजन में पांच किलो की बढ़ोतरी की है। दस साल पहले किसी पुरुष के लिए आदर्श वजन 60 किलो था, जिसे बढ़ाकर 65 किलो कर दिया गया है। अब देश का बॉडी मास इंडेक्स बदल गया है। वहीं महिला के लिए आदर्श वजन 50 किलो था, जो अब बढ़कर 55 किलो हो गया है। इसके अलावा महिला और पुरुष के लिए आदर्श लंबाई को लेकर भी कई बदलाव किए गए हैं। पुरुष के लिए आदर्श लंबाई 5 फुट 6 इंच (171 सेमी), जबकि महिला के लिए 5 फुट (152 सेमी) थी। लेकिन अब इसे भी बदल दिया गया है। नए पैमाने के आधार पर पुरुष के लिए 5 फुट 8 इंच (177 सेमी) की लंबाई आदर्श मानी जाएगी और महिला के लिए 5 फुट 3 इंच (162 सेमी) तय की गई है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन ने जारी रिपोर्ट में बताया कि भारतीयों के लिए पोषण आहार और अनुमानित औसत आवश्यकता की सिफारिशों को भी संशोधित किया गया है। देश में महिला और पुरुषों के रेफरेंस एज में भी बदलाव किया गया है। इसे 2010 के 20-39 की जगह अब 19-39 कर दिया गया है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि 1989 की विशेषज्ञ कमिटी ने केवल बच्चों और किशोरों का ही वजन और लंबाई को शामिल किया था। इसके अलावा 2010 की कमिटी ने केवल दस राज्यों के नमूने ही लिए थे। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के वैज्ञानिकों ने बताया कि बीएमआई में इसलिए बदलाव किया गया है क्योंकि भारतीयों के पोषक खाद्य तत्वों के सेवन में बढ़ोतरी हुई है। इस साल के सर्वे में ग्रामीणों को भी शामिल किया गया है, जबकि दस साल पहले केवल शहरी इलाकों को ही शामिल किया गया था। 2020 में किया गया सर्वे अब तक किए गए सभी सर्वों में सबसे बड़ा है। इसमें वैज्ञानिकों के पैनल ने पूरे देश से डाटा लिया है। इसमें सभी संस्थानों के अध्ययन को शामिल किया गया है। पहली बार आईसीएमआर एक्सपर्ट कमिटी ने फाइबर आधारित एनर्जी पोषक तत्व का भी ध्यान रखा है। बीएमआई एक लोकप्रिय टर्म है, जिसके जरिए ये पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति के शरीर के हिसाब से उसका वजन और ऊंचाई कितनी होनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स निर्धारित मानक से ज्यादा होता है तो वो शरीर के लिए सही नहीं माना जाता है।

 

 

05-09-2020
फेसबुक ने किया बदलाव, मैसेंजर में की मैसेज फारवर्ड की लिमिट तय..

नई दिल्ली। फेसबुक द्वारा मैसेंजर पर व्हाट्सऐप की तरह ही एक नया फ़ीचर लाया गया है। इस फ़ीचर के तहत अब एक बार में सिर्फ़ पांच कॉन्टेक्ट को ही मैसेज फ़ॉरवर्ड किए जा सकते हैं। गौरतलब है कि 2018 में व्हाटसऐप में फ़ॉरवर्ड लिमिट का फ़ीचर आया था। अब कंपनी ने इसी तरह का फ़ीचर मैसेंजर में लाने का ऐलान किया है। दरअसल ये फ़ीचर मिस इन्फ़ॉर्मेशन और फेक न्यूज़ को वायरल होने से रोकने के लिए किया गया है। कंपनी को लगता है कि ऐसा करते वायरल मिस इन्फ़ॉर्मेशन और हार्मफुल कॉन्टेंट को स्लो डाउन करने का अच्छा तरीक़ा है। फेसबुक मैसेंजर में मैसेज फॉरवर्डिंग लिमिट का फीचर फिलहाल बीटा टेस्टिंग में है और टेस्ट सफल होने के बाद इसे सभी के लिए जारी किया जाएगा। नए अपडेट में एक ही मैसेज को पांच से अधिक लोगों को फॉरवर्ड करने पर “forwarding limit reached” का नोटिफिकेशन मिलेगा।

फेसबुक मैसेंजर के इस फीचर को पहली बार इसी साल मार्च में टेस्टिंग के दौरान देखा गया था और अब कंपनी इसे कुछ चुनिंदा यूजर्स के लिए जारी कर रही है। फेसबुक की तरफ से जारी एक स्टेटमेंट में कहा गया कि फॉरवर्डिंग लिमिट वायरल गलत जानकारियों व हानिकारक कॉन्टेंट के प्रसार को कम करने का एक प्रभावी तरीका है, इस तरह की जानकारियां वास्तविक दुनिया को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती हैं। बता दें कि व्हाटसऐप में फ़ॉरवर्ड लिमिट सेट करने के बाद इस तरह के मैसेज में 70 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। फॉरवर्ड मैसेज लिमिट के अलावा, व्हाट्सऐप टीम भी अपने प्लेटफॉर्म पर फ्रिक्वेंट फारवर्ड मैसेज पर सीमा लगाने की कोशिश कर रही है। पिछले साल व्हाट्सऐप ने अपने एंड्रॉयड और आईओएस ऐप के लिए Frequently Forwarded मैसेज का लेबल रोलआउट किया था। वहीं, इस साल अप्रैल में व्हाट्सऐप ने फ्रिक्वेंटली फॉरवर्डेड मैसेज पर सीमा लगा दी थी।

 

16-08-2020
संसद में दिखेगा कोरोना वायरस का असर,बैठक व्यवस्था में होगा बदलाव,की गईं खास तैयारियां

नई दिल्ली। कोविड-19 के मद्देनजर पहली बार कई तरह की कवायदों के साथ संसद के मॉनसून सत्र के लिए तैयारियां की जा रही हैं। संक्रमण से बचाव के लिए लोकसभा और राज्यसभा में बैठने की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है। उचित दूरी का पालन करते हुए सदस्यों के बैठने के लिए दोनों चैंबरों और दीर्घाओं का इस्तेमाल होगा। अधिकारियों ने इस बारे में बताया। अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के आरंभ में मॉनसून सत्र की शुरुआत होने की संभावना है।
राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक सत्र के दौरान ऊपरी सदन के सदस्यों को दोनों चैंबर और दीर्घाओं में बैठाया जाएगा। भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार इस तरह की व्यवस्था होगी जहां 60 सदस्य चैंबर में बैठेंगे और 51 सदस्य राज्यसभा की दीर्घाओं में बैठेंगे। इसके अलावा बाकी 132 सदस्य लोकसभा के चैंबर में बैठेंगे। लोकसभा सचिवालय भी सदस्यों के बैठने के लिए इसी तरह की व्यवस्था कर रहा है।

दीर्घाओं से भागीदारी के लिए पहली बार बड़े डिस्प्ले वाली स्क्रीन और कंसोल लगाए जाएंगे। दोनों सदनों के बीच विशेष तार बिछाए जाएंगे और कुर्सियों के बीच पॉलीकार्बोनेट शीट की व्यवस्था होगी। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू और लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने 17 जुलाई को बैठक कर सत्र चलाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार-विमर्श करने के बाद दोनों सदनों के चैंबरों और दीर्घाओं का इस्तेमाल करने का फैसला किया।
नायडू ने अधिकारियों को अगस्त के तीसरे सप्ताह तक सत्र के लिए तैयारियां पूरी कर लेने का निर्देश दिया था, ताकि इस व्यवस्था का मुआयना हो जाए और इसे अंतिम रूप दिया जा सके। राज्यसभा सचिवालय भी इस काम के लिए पिछले दो सप्ताह से लगातार काम कर रहा है।

सूत्रों ने बताया कि आम तौर पर दोनों सदनों में एक साथ बैठकें होती हैं लेकिन इस बार असाधारण परिस्थिति के कारण एक सदन सुबह के समय बैठेगा और दूसरे की कार्यवाही शाम में होगी। कोरोना वायरस महामारी के कारण संसद के बजट सत्र की अवधि में कटौती कर दी गयी थी और 23 मार्च को दोनों सदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था। परिपाटी के तहत अंतिम सत्र से छह महीने के अंत के पहले संसद का सत्र आहूत होता है।
अधिकारियों ने बताया कि कोविड-19 का प्रसार रोकने के लिए सामाजिक दूरी के नियमों के पालन के साथ पहली बार सदन में बैठने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न दलों को संख्या के आधार पर राज्यसभा के चैंबर और दीर्घाओं में सीट आवंटित किए जाएंगे और बाकी सदस्यों को सत्तारूढ़ दलों और अन्य के लिए दो खंड में लोकसभा के चैंबर में बैठाया जाएगा। राज्यसभा चैंबर के भीतर प्रधानमंत्री, सदन के नेता, विपक्ष के नेता और अन्य दलों के नेताओं के लिए सीटें चिन्हित की जाएंगी। पूर्व प्रधानमंत्री-मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा के साथ ही केंद्रीय मंत्रियों और राज्यसभा सदस्य-रामविलास पासवान और रामदास आठवले के लिए भी सदन के चैंबर में चिन्हित सीटें होंगी। अन्य मंत्रियों को सत्तारूढ़ सदस्यों के लिए तय सीटों पर बैठाया जाएगा।

 

21-06-2020
अब चीनी सैनिकों को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब, एलएसी पर तैनात कमांडरों को मिली छूट, नियमों में हुआ बदलाव

नई दिल्ली। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। गलवान घाटी में चीन की सेना के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद सेना ने युद्ध के नियम में एक अहम बदलाव किया है। इस बदलाव के बाद अब एलएसी पर तैनात सभी कमांडरों को हालात को संभालने के लिए सामरिक स्तर पर कोई भी कार्रवाई करने की पूरी छूट दे दी गई है। पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में 15-16 की दरमियानी रात को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद रूल्स ऑफ इंगेजमेंट (आरओई) में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। गलवां घाटी की झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात कमांडर्स को पूरी छूट दी गई है ताकि वे सामरिक स्तर पर स्थिति को संभाल सकें। इसकी जानकारी नाम न बताने की शर्त पर दो अधिकारियों ने दी।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवां घाटी में सात घंटे तक हिंसक झड़प हुई थी। भारतीय सेना ने अपने बयान में कहा था कि दोनों ही पक्षों को नुकसान हुआ है। 1975 के बाद यह पहली बार था जब एलएसी पर कोई जवान शहीद हुआ। दूसरे अधिकारी ने कहा कि आरओई में परिवर्तन सीमा पर हुई हिंसक झड़पों के बाद आवश्यक थे। सेना ने आखिरकार 15 जून की झड़प के बाद अपने सैनिकों की प्रतिक्रिया के दायरे को सीमित न करने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ‘15 जून से पहले पांच-छह मई को पेंगोंग त्सो और गलवां घाटी (मई मध्य) में हुई हिंसक झड़प हुई थी। सभी मौकों पर वे भारी संख्या में आए और हमारे सैनिकों पर लोहे की रॉड में कील और बेंत में लगे नुकीले तारों से हमला किया। हमारे सैनिकों ने निडर होकर लड़ाई लड़ी लेकिन आरओई पर गौर करना जरूरी था।’ उत्तरी सेना के पूर्व सेनानिवृत्त कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल ने कहा, ‘चूंकि एलएसी पर गश्त के दौरान सैनिकों को हथियार ले जाने की अनुमति है। यह अंतर्निहित है कि वे गलवां घाटी में हुए हमले जैसी अभूतपूर्व स्थिति में हथियारों का उपयोग कर सकते हैं।’ बता दें कि पेट्रोलिंग के दौरान फॉरवर्ड सैनिक पीठ पर टंगी अपनी बंदूक की नली को जमीन की ओर और गोलियों को जेब में रखते हैं।

19-06-2020
सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद इंस्टाग्राम ने उठाया यह कदम, किया यह बदलाव

मुंबई। बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद उनके फैंस ने काफी मिस कर रहे हैं। अपनी मौत के साथ ही सुशांत अपनी अनगिनत यादों और खूबसूरत पलों को पीछे छोड़ गए हैं। सुशांत की मौत पर किसी के लिए एक गहरे सदमे की तरह साबित हुई है। सभी के लिए इस बात पर यकीन कर पाना बेहद मुश्किल है कि सुशांत ने अब इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। अब सुशांत के निधन के बाद उनके ऑफिशल इंस्टाग्राम अकाउंट में भी एक बदलाव देखने को मिला है। इंस्टाग्राम ने सुशांत के प्रोफाइल पर अब 'रिमेंबरिंग' (Remembering) शब्द जोड़ दिया है। सुशांत के इंस्टाग्राम अकाउंट को अब उनकी यादगार वस्तु के रूप में सहेजते हुए इंस्टाग्राम ने यह कदम उठाया है। गौरतलब है कि हाल ही में सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने फेसबुक के जरिए इस बात की घोषणा की थी कि भाई की याद में उनके सभी यादगार चीजों को, उनकी कहावतों और साथ ही उनके लिखे गए लेख को एक वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा। यह वेबसाइट उन्हें समर्पित की जाएगी तथा फैंस यहां एक्टर द्वारा लिखी गई दिलचस्प बातों को पढ़ सकते हैं।

30-04-2020
श्रमिकों के जीवन की पाठशाला बने शिविर स्थल,जिंदगी में बदलाव सहज रूप से स्वीकार्य

रायपुर/बैकुठपुर। कोरोना शिविर स्थल को जीवन की पाठशाला मान चुके श्रमिक देवकुमार (बदला हुआ नाम) ने बताया संकट की स्थिति में हमे अपना धैर्य न खोते हुए उत्साहपूर्वक परिस्थियों का सामना करना चाहिए और एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए, इसी आत्मबल ने उनको परिवार से दूर रहने में मदद की है।जिला प्रशासन द्वारा न केवल उनके भोजन व आवास संबंधी समस्याओं को हल किया जा रहा है बल्कि दैनिक जीवन के लिए आवश्यक विभिन्न सामग्रियों को उपलब्ध कराया जा रहा है|  मनोरंजन के लिए टेलीविजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। प्रतिदिन प्रातः पीटी कराई जाती है और योग की कक्षाएं आयोजित की जाती हैं,जिससे शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति और उत्साह का संचार होता है।श्रमिक बालचन्द्र (बदला हुआ नाम) ने बताया राहत शिविर में सारी व्यवस्थाएं अच्छे ढंग से संचालित हैं। उन्होंने राहत शिविर में रह रहे श्रमिकों की दिनचर्या के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सभी लोग सुबह 6 बजे उठते हैं, फिर स्टेडियम में पीटी और योग करते हैं। मनोरंजन के लिए कैरम,लूडो आदि साधन है। हम सभी को इस कोरोना काल में आश्रय के साथ सीख भी मिली है जो आजीवन यादगार रहेगी|
कोरोना महामारी की वजह से देशव्यापी लॉक डाउन अवधि में प्रवासी श्रमिकों का जिला प्रशासन द्वारा पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

जिले में इस दौरान प्रवासी श्रमिकों के लिए भोजन, आवास के साथ साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए शिविर में मनोरंजन और आत्मिक विकास का ख्याल भी रखा जा रहा है,जिससे जिले में प्रवासी श्रमिकों को शिविर में अपनेपन का अहसास हो रहा है। जिले के विकासखंड बैकुण्ठपुर,मनेन्द्रगढ़,खड़गवां एवं भरतपुर में स्थित राहत शिविरों में 400 से भी अधिक श्रमिक एवं नागरिक ठहरे हुए हैं।कलेक्टर डोमन सिंह द्वारा स्वयं भी शिविर का अवलोकन कर प्रवासी श्रमिकों से चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन कर रहे है। उन्होंने कहा इस आपदा की स्थिति में श्रमिक स्वयं को बिल्कुल भी अकेला न समझें। जिला प्रशासन का प्रत्येक अधिकारी व कर्मचारी आप सब के साथ है और इस बात का ध्यान  रख रहे हैं कि किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो।जिला प्रशासन द्वारा शिविर में रहने वाले लोगों को मॉस्क वितरण के साथ समय-समय पर  स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा सभी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है।

शिविर स्थल की जानकारी
विकासखंड बैकुण्ठपुर में स्थित मानस भवन के राजस्व शिविर में 10 शरणार्थी, बैकुण्ठपुर पुलिस लाइन स्थित शिविर में 97, देवानी बांध मनसुख स्थित शिविर में 50 लोग एवं उप तहसील पटना में स्थित सामुदायिक भवन राहत शिविर में 36 लोग ठहरे हुए हैं। इसके साथ ही एसईसीएल द्वारा पंडोपारा स्थित सामुदायिक भवन में 51 लोग एवं बुढ़ार स्थित हाईस्कूल भवन को राहत शिविर में तब्दील किया है,जहां 10 लोग ठहरे हैं। विकासखंड मनेन्द्रगढ़ में चार राहत शिविर हैं,जिनमें सामुदायिक भवन खोंगापानी में 8 लोग, सामुदायिक भवन लाई में 39 लोग, माध्यमिक शाला कठौतिया में 14 लोग एवं उप तहसील केल्हारी में स्थित राहत शिविर में 8 लोग रूके हैं। विकासखंड खड़गवां में दुबछोला स्थित ग्राम पंचायत भवन राहत शिविर में 45 लोग एवं खड़गवां के सामुदायिक भवन राहत शिविर में 22 लोग रह रहे हैं। इसी तरह विकासखंड भरतपुर के देवगढ़ स्थित सामुदायिक भवन में 21 लोग ठहरे हैं।

19-04-2020
यूट्यूब ने अपने एंड्राइड ऐप में किया ये बदलाव...सोशल मीडिया पर किया जा रहा है ट्रोल

मुंबई। वीडियो शेयरिंग कंपनी यूट्यूब ने अपने एंड्राइड ऐप में कुछ बदलाव किए हैं। दुनियाभर में हो रहे दिन प्रतिदिन बदलाव को देखते हुए यहा परिवर्तन किया गया है। भारतीय उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए यूट्यूब ने अपने एंड्राइड ऐप में वीडियो के देखे जाने वालों की गिनती को अब मिलियन और बिलियन से हटाकर लाख और करोड़ में दिखाना शुरू कर दिया है। हालांकि मिलियन और बिलियन के आदी हो चुके भारतीयों को यूट्यूब का यह नया बदलाव बिल्कुल भी गले नहीं उतर रहा है और वह सोशल मीडिया पर लगातार इसकी बुराई कर रहे हैं। यूट्यूब के दुनियाभर में लगभग 200 करोड़ उपभोक्ता हैं, उनमें से लगभग 26 करोड़ पचास लाख उपभोक्ता अकेले भारत में पाए जाते हैं। एक बड़ी संख्या को उनकी ही क्षेत्रीय भाषा में लुभाने के लिए यूट्यूब ने यह बड़ा कदम उठाया है। हालांकि बिलियन और मिलियन से लाख और करोड़ में हुआ यह बदलाव अभी सभी भारतीयों को दिखाई देना शुरू नहीं हुआ है।

यूट्यूब ने बहुत छोटे पैमाने पर यह प्रयोग कुछ मुट्ठी भर एंड्राइड ऐपधारियों के ऊपर करके देखा है। इस प्रयोग के अंतर्गत किसी भी वीडियो के देखने वालों की संख्या ही नहीं, बल्कि किसी यूट्यूब चैनल के सब्सक्राइबर्स की संख्या को भी लाख और करोड़ में ही दिखाया जाएगा। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो यूट्यूब इसे सभी प्लेटफार्म के लिए लागू कर सकता है। जैसे ही इस बदलाव की खबर फैली, वैसे ही सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। जिन लोगों के एंड्राइड ऐप पर यह बदलाव हुए हैं, उन्होंने अपने फोन से स्क्रीनशॉट लेकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और टि्वटर पर साझा करना शुरू कर दिया। ज्यादातर लोगों ने इस बदलाव को बहुत ही खराब बताया। उनका मानना है कि वे अब मिलियन और बिलियन में गिनती करने के आदी हो गए हैं इसलिए लाख और करोड़ में किसी भी संख्या को गिनना हजम नहीं होता।

13-02-2020
पेट्रोल की कीमत में नहीं हुआ कोई बदलाव, डीजल हुआ सस्ता

नई दिल्ली। पेट्रोल की कीमत में गुरुवार को भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं डीजल के दाम में गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार ग्राहकों को एक लीटर पेट्रोल के लिए बुधवार वाली कीमत ही चुकनी होगी और डीजल बुधवार के मुकाबले कम पैसों में मिल जाएगा। गुरुवार को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत क्रमश: 71.94, 74.58, 77.60 और 74.73 रुपये प्रति लीटर है। वहीं डीजल की बात करें, तो दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में एक लीटर डीजल की कीमत पांच पैसे कम हुई है, जिसके बाद यह क्रमश: 64.82, 67.14, 67.93 और 68.45 रुपये प्रति लीटर है।

बता दें कि प्रति दिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम में कीमत में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बादल इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है।

02-02-2020
बजट के दूसरे दिन आम जनता को राहत, कम हुए पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली। एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया और इसके अगले ही दिन आम लोगों के लिए राहत भरी खबर आई। रविवार को लगातार चौथे दिन तेल कंपनियों ने देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी कर दी है। यानी आज ग्राहकों को एक लीटर पेट्रोल-डीजल के लिए शनिवार के मुकाबले कम कीमत चुकानी होगी।

चार महानगरों में इतने हुए पेट्रोल-डीजल के दाम

दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत में नौ पैसे की कमी आई है। वहीं कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल आठ पैसे सस्ता हुआ है। इसके बाद इन राज्यों में पेट्रोल की कीमत क्रमश: 73.10, 75.77, 78.75 और 75.95 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल की बात करें, तो दिल्ली में एक लीटर डीजल आठ पैसे कम हुआ है, कोलकाता में पांच पैसे, मुंबई में छह पैसे और चेन्नई में सात पैसे, जिसके बाद इसकी कीमत क्रमश: 66.14, 68.54, 69.36 और 69.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

प्रति दिन छह बजे बदलती है कीमत

बता दें कि प्रति दिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम में कीमत में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बादल इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है।

कीमत तय करने का ये है आधार

विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। इन्हीं मानकों के आधार पर पर पेट्रोल रेट और डीजल रेट रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं।

पेट्रोल में कितना हिस्सा टैक्स का

खुदरा बिकने वाले पेट्रोल और डीजल के लिए जितनी रकम का आप भुगतान करते हैं, उसमें आप 55.5 फीसदी पेट्रोल के लिए और 47.3 फीसदी डीजल के लिए आप टैक्स चुका रहे होते हैं।

डीलर भी जोड़ते हैं अपना मार्जिन

डीलर पेट्रोल पंप चलाने वाले लोग हैं। वे खुद को खुदरा कीमतों पर उपभोक्ताओं के अंत में करों और अपने स्वयं के मार्जिन जोड़ने के बाद पेट्रोल बेचते हैं। पेट्रोल रेट और डीजल रेट में यह कॉस्ट भी जुड़ती है।

 

27-01-2020
हिंसा और अहिंसा के विषय पर 'मन की बात' में बोले पीएम मोदी, कहा शांति है हर सवाल का जवाब

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शाम छह बजे 'मन की बात' की। गणतंत्र दिवस समारोह की वजह से इस रविवार प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम के समय में यह बदलाव किया गया। कार्यक्रम का समय सुबह 11 बजे की बजाय शाम छह बजे का तय किया गया था।  नए साल की शुरुआत के बाद  'मन की बात' कार्यक्रम का यह पहला आयोजन था।

पीएम मोदी ने कहा कि - हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है और शांति हर सवाल के जवाब का आधार होना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि एकजुटता से हर समस्या के समाधान का प्रयास हो और भाईचारे के जरिए हर विभाजन और बंटवारे की कोशिश को नाकाम करें। आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि हम इक्कीसवीं सदी में हैं, जो ज्ञान-विज्ञान और लोकतंत्र का युग है। क्या आपने किसी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां हिंसा से जीवन बेहतर हुआ हो ?
 
प्रधानमंत्री मोदी के 'मन की बात':-
देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की भावना, हर दिन, पहले से अधिक मजबूत होती जाती है।

दिन बदलते हैं, हफ्ते बदल जाते हैं, महीने भी बदलते हैं, साल बदल जाते हैं, लेकिन, भारत के लोगों का उत्साह और हम भी कुछ कम नहीं हैं, हम भी कुछ करके रहेंगे  ‘कर सकते हैं’...ये ‘कर सकते हैं’ का भाव, संकल्प बनता हुआ उभर रहा है।

इस बार ‘गणतंत्र दिवस’ समारोह की वजह से आपसे ‘मन की बात’, उसके समय में परिवर्तन करना, उचित लगा। और इसीलिए, एक अलग समय तय करके आज आपसे ‘मन की बात’ कर रहा हूं।

हम इक्कीसवीं सदी में हैं, जो ज्ञान-विज्ञान और लोकतंत्र का युग है। क्या आपने किसी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां हिंसा से जीवन बेहतर हुआ हो? हिंसा, किसी समस्या का समाधान नहीं करती।

वर्ष 2022 में हमारी आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं और उस मौके पर हमें गगनयान मिशन के साथ एक भारतवासी को अंतरिक्ष में ले जाने के अपने संकल्प को सिद्ध करना है।

स्वच्छता के बाद जन भागीदारी की भावना एक और क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है और वह है जल संरक्षण। इसके लिए कई व्यापक और नवोन्मेषी प्रयास देश भर में चल रहे हैं। समाज के हर क्षेत्र के लोग इसमें भागीदारी कर रहे हैं।

जब हर भारतवासी एक कदम चलता है तो हमारा भारतवर्ष 130 करोड़ कदम आगे बढ़ता है।
दिन बदलते हैं, हफ्ते बदल जाते हैं, महीने भी बदलते हैं, साल बदल जाते हैं, लेकिन भारत के लोगों का उत्साह कायम है कि , हम कुछ करके रहेंगे। हम कुछ कर के रहेंगे का भाव, संकल्प बनता हुआ उभर रहा है।

देशवासियों को यह जानकर बहुत प्रसन्ता होगी कि पूर्वोत्तर में अलगाववाद बहुत कम हुआ है और इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस क्षेत्र से जुड़े हर एक मुद्दे को शांति के साथ, ईमानदारी से चर्चा करके सुलझाया जा रहा है।

विश्व, भारत से जो अपेक्षा करता है, उन अपेक्षाओं को पूर्ण करने का सामर्थ्य, भारत प्राप्त करके रहेगा , इस विश्वास के साथ आइये- नए दशक की शुरुआत करते हैं और नए संकल्पों के साथ मां भारती के लिए जुट जाते हैं।

मोदी ने कहा कि हिंसा, किसी समस्या का समाधान नहीं करती। दुनिया की किसी भी समस्या का हल, कोई दूसरी समस्या पैदा करने से नहीं बल्कि अधिक-से-अधिक उसका समाधान ढूंढकर ही हो सकता है।

आइये, हम सब मिल कर,एक ऐसे नए भारत के निर्माण में जुट जाएं, जहां शांति हर सवाल के जवाब का आधार हो। एकजुटता से हर समस्या के समाधान के प्रयास हो और, भाईचारा, हर विभाजन और बंटवारे की कोशिश को नाकाम करे।

पिछले वर्ष, त्रिपुरा में भी 80 से अधिक लोग, हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्य-धारा में लौट आए हैं जिन्होंने यह सोचकर हथियार उठा लिए थे कि हिंसा से समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है, उनका यह विश्वास दृढ़ हुआ है कि शांति और एकजुटता ही, किसी भी विवाद को सुलझाने का एक-मात्र रास्ता है।

देश के किसी भी कोने में अब भी हिंसा और हथियार के बल पर समस्याओं का समाधान खोज रहे लोगों से आज, इस गणतंत्र-दिवस के पवित्र अवसर पर अपील करता हूं कि वे वापस लौट आएं। मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में, अपनी और इस देश की क्षमताओं पर भरोसा रखें। 

ब्रू-रियांग शरणार्थियों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गए | इसके साथ ही, लगभग 25 वर्ष पुरानी ब्रू-रियांग शरणार्थी समस्या के एक दर्दनाक अध्याय का अंत हुआ। यह समस्या 90 के दशक की है | 1997 में जातीय तनाव के कारण ब्रू रियांग जनजाति के लोगों को मिजोरम से निकल करके त्रिपुरा में शरण लेनी पड़ी थी | इन शरणार्थियों को उत्तर त्रिपुरा के कंचनपुर स्थित अस्थाई कैम्पों में रखा गया था। यह बहुत पीड़ादायक है कि ब्रू रियांग समुदाय के लोगों ने शरणार्थी के रूप में अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खो दिया था। 23 साल तक - न घर, न जमीन, न परिवार के लिए , बीमारी के लिए इलाज का प्रबंध और ना बच्चों के शिक्षा की सुविधा।

 सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन इनकी पीड़ा का हल नहीं निकल पाया। लेकिन इतने कष्ट के बावजूद भारतीय संविधान और संस्कृति के प्रति उनका विश्वास अडिग बना रहा।

इसी विश्वास का नतीजा है कि उनके जीवन में आज एक नया सवेरा आया है। समझौते के तहत, करीब 34000 ब्रू-शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा। इतना ही नहीं, उनके पुनर्वास और सर्वांगीण-विकास के लिए केंद्र सरकार लगभग 600 करोड़ रुपये की मदद भी करेगी। प्रत्येक विस्थापित परिवार को घर बनाने में उनकी मदद की जाएगी। इसके साथ ही, उनके राशन का प्रबंध भी किया जाएगा। ये समझौता कई वजहों से बहुत खास है। ये सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाता है।

19-08-2019
बदला और तबादला को ही बदलाव समझ बैठी है कांग्रेस: भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने प्रदेश में बढ़ रही आपराधिक वारदातों के मद्देनजर नागरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था के सरकारी दावों पर सवालिया निशान दागा है। उपासने ने कहा कि लगातार बढ़ रहे अपराधों ने पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ा दी है। भाजपा प्रवक्ता उपासने ने कहा कि दुर्ग, बालोद में व्यापारियों से सरेआम लूट की तीन बड़ी वारदातों से नागरिक सुरक्षा सवालों के दायरे में है। इसी के तुरंत बाद राजधानी में दो दिन में चैन स्नेचिंग की घटी तीन वारदातों ने राजधानी की पुलिसिंग पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उपासने ने कहा कि प्रदेश में बढ़ रहे अपराध प्रदेश सरकार की विफल कार्यशैली का जीता-जागता सबूत है। छत्तीसगढ़ को बदलने का दावा कर सत्ता में आयी कांग्रेस सरकार केवल बदला और तबादला को ही बदलाव मान बैठी है।

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