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17-01-2020
इसरो ने लॉन्च किया संचार उपग्रह जीसैट-30, इतने साल तक करेगा काम

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नाम एक और कामयाबी जुड़ गई है। इसरो ने शुक्रवार को सुबह करीब दो बजकर 35 मिनट पर संचार उपग्रह जी-सैट 30 का प्रक्षेपण यूरोपीयन स्पेस एजेंसी एरियनस्पेस के फ्रेंच के गुआना में एरियन-5 व्हीकल से सफलतापूर्वक कर दिया। इसके थोड़ी देर बाद यह व्हीकल से अलग हो गया और अपनी कक्षा की ओर बढ़ गया। ये सैटेलाइट इनसैट-4ए की जगह लेगा। जीसैट-30 का वजन करीब 3,357 किलोग्राम है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण के बाद कु-बैंड और सी-बैंड कवरेज में बढ़ोतरी होगी।

इससे भारतीय क्षेत्र और द्वीपों के साथ बड़ी संख्या में खाड़ी और एशियाई देशों के साथ ऑस्ट्रेलिया में पहुंच बढ़ेगी। जीसैट-30 संचार सैटेलाइट है जो 15 साल के मिशन के लिए प्रक्षेपित किया गया है। इसरो ने इस सैटेलाइट को 1-3केबस मॉडल में तैयार किया है, जो जियोस्टेशनरी ऑर्बिट के सी और कु-बैंड से संचार सेवाओं में मदद करेगा। इसरो के अनुसार इस सैटेलाइट की मदद से टेलीपोर्ट सेवा, डिजिटल सैटेलाइट न्यूज गैदरिंग, डीटीएच टेलिविजन सेवा, मोबाइल सेवा कनेक्टिविटी जैसे कई सुविधाओं को बेहतर करने में मदद मिलेगी। कु-बैंड सिग्नल से पृथ्वी पर चल रही गतिविधियों को पकड़ा जा सकता है।

11-12-2019
डिफेंस सैटेलाइट रीसैट-2 बीआर 1 सफलतापूर्वक लॉन्च

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने बुधवार को दोपहर 3.25 बजे ताकतवर राडार इमेजिंग सैटेलाइट रीसैट-2बीआर1 की सफल लॉन्चिंग की है। लॉन्चिंग के बाद अब देश की सीमाओं पर नजर रखना आसान हो जाएगा। ये सैटेलाइट रात के अंधेरे और खराब मौसम में भी काम करेगा। इस लॉन्चिंग के साथ ही इसरो के नाम एक और रिकॉर्ड बन गया है। इसरो ने 20 सालों में 33 देशों के 319 उपग्रह छोड़ा है। 1999 से लेकर अब तक इसरो ने कुल 310 विदेशी सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में स्थापित किए हैं। 

 

11-12-2019
अंतरिक्ष अभियानों का ‘अर्द्धशतक’ पूरा करेगा पीएसएलवी सी-48, जाने ख़ास बातें

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए बुधवार का दिन बेहद खास होने जा रहा है। इसरो आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लांचिंग पैड से दोपहर 3.25 बजे पीएसएलवी सी-48 रॉकेट को लांच करेगा। मंगलवार दोपहर बाद 4.40 बजे पीएसएलवी की उड़ान की उल्टी गिनती शुरू कर दी गई। अपनी इस उड़ान के साथ यह रॉकेट अंतरिक्ष अभियानों का अपना ‘अर्द्धशतक’ पूरा कर लेगा। साथ ही यह श्रीहरिकोटा से छोड़ा जाने वाला भी 75वां मिशन होगा। इस बार इसरो पीएसएलवी के जरिये एक साथ 10 सैटेलाइट को आसमान में रवाना करने जा रहा है। इनमें देश की दूसरी खुफिया आंख कही जा रही रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट आरआईसैट-2बीआर1 भी शामिल है। इसरो के मुताबिक, इस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में 576 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में 37 डिग्री झुकाव पर स्थापित किया जाएगा। इस सैटेलाइट के अंतरिक्ष में स्थापित होने के साथ देश की सीमाओं पर घुसपैठ की कोशिश लगभग नामुमकिन हो जाएंगी।

सेंसर देंगे सीमापार आतंकियों के जमावड़े की भी सूचना

इसमें लगे खास सेंसरों के चलते सीमापार आतंकियों के जमावड़े की भी सूचना पहले ही मिल जाएगी। साथ ही सीमापार की गतिविधियों का विश्लेषण भी आसान हो जाएगा। 22 मई को लांच की गई आरआईसैट-2बी पहले से ही देश की खुफिया आंख के तौर पर निगरानी का काम कर रही है। इसके अलावा पीएसएलवी के साथ जाने वाली 9 अन्य सैटेलाइट विदेशी हैं, जिनमें अमेरिका की 6, इस्राइल की 1, इटली की 1 और जापान की 1 सैटेलाइट है।

ये सभी इंटरनेशनल कस्टमर सैटेलाइट एक नए कमर्शियल सिस्टम न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के तहत लांच किया जा रहा है। इन सभी सैटेलाइट को पीएसएलवी के उड़ान भरने के 21 मिनट के अंदर बल्बनुमा पेलोड फायरिंग तकनीक के जरिये एक के बाद एक अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। इस उड़ान के लिए मंगलवार को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। इस ऐतिहासिक उड़ान का दीदार करने के लिए पांच हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था भी की गई है।

आरआईसैट की होगी यह खासियत

05 साल तक सीमाओं की निगरानी करेगी यह सैटेलाइट
628 किलोग्राम का रखा गया है इस सैटेलाइट का वजन
100 किलोमीटर इलाके की तस्वीर एक साथ ले पाएगी
यह सैटेलाइट दिन और रात में एक जैसी निगरानी करेगी
माइक्रोवेव फ्रीक्वेंसी पर काम करेगी यह सैटेलाइट
एक्स बैंड एसएआर कैपेबिल्टी के चलते हर मौसम में साफ तस्वीर देगी
स्वदेश में बने खास डिफेंस इंटेलिजेंस सेंसर से युक्त है

लांच से पहले तिरुपति दर्शन को पहुंचे इसरो चीफ

पीएसएलवी सी-48 के बुधवार को उड़ान भरने से पहले इसरो चीफ डा. के सिवन मंगलवार को यहां तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचे। सिवन ने भगवान के दर्शन करने के साथ ही पूजा भी की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से वार्ता में कहा कि पीएसएलवी सी-48 की लांचिंग इसरो के लिए ऐतिहासिक पल होगा, क्योंकि यह इस रॉकेट की 50वीं और श्रीहरिकोटा लांचिंग स्टेशन से किसी रॉकेट की 75वीं उड़ान होगी।

इस्राइली स्कूली छात्रों की सैटेलाइट भी भेजेगा इसरो

इस अभियान में इसरो पीएसएलवी सी-48 के जरिये इस्राइल के तीन छात्रों की तरफ से डिजाइन की गई ‘डूचीफैट-3’ सैटेलाइट को भी लांच करेगा। दक्षिण इस्राइल के अशांत गाजा पट्टी क्षेत्र से महज एक किमी दूर स्थित शा हनेगेव हाईस्कूल के इन तीनों छात्रों एलोन अब्रामोविच, मीतेव असुलिन और शमुएल अविव लेवी की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच है। इन्होंने इस सैटेलाइट को हर्जलिया साइंस सेंटर और अपने स्कूल के साथ मिलकर बनाया है। छात्रों के मुताबिक, इस रिमोट सेन्सिंग फोटो सैटेलाइट से देश भर के बच्चों को पृथ्वी को देखने और विश्लेषण करने की सुविधा मिलेगा। साथ ही किसानों को भी इसका लाभ होगा।

छात्रों का प्रोजेक्ट, कम बजट में बड़े काम

उपग्रह की योजना, अंतरिक्ष में उसकी कार्यप्रणाली और जमीन से सॉफ्टवेयरों के जरिए उससे संपर्क आदि को छात्रों ने ही तैयार किया। यह केवल 2.3 किलो का है। इसे तैयार करने में करीब ढाई वर्ष लगे। कुल 60 विद्यार्थियों ने मिलकर इसे तैयार किया है। सभी निर्णय इन्होंने ही मिलकर लिए।  उनसे संबंधित वरिष्ठ लोग केवल सुझावदाता की भूमिका में रहे। छात्रों ने कम बजट के बावजूद उपग्रह से डाटा ट्रांसफर सुनिश्चित करने के लिए उपग्रह द्वारा ली जाने वाली तस्वीरों को कंप्रेस करके पृथ्वी पर भेजने की तकनीक का उपयोग किया है।

भारत की अंतरिक्ष विज्ञान में हासिल सफलताओं से प्रभावित हैं छात्र

प्रोजेक्ट में शामिल एलोन ने बताया कि उपग्रह को तैयार करते हुए कई बाधाएं अचानक सामने आईं। इसने उन्हें कई चीजें सीखने का अवसर दिया। भारत की अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हासिल सफलताओं से प्रभावित इन विद्यार्थियों ने उम्मीद जताई कि उन्हें इसरो के श्रीहरिकोटा केंद्र पर भी जाने का अवसर मिलेगा। इसी समूह में इंग्लैंड से भी एक छात्र शामिल होगा।

09-12-2019
सीधे इंटरव्यू के जरिये पाए इसरो में नौकरी, ऐसे करें आवेदन

रायपुर। केंद्र सरकार अपने अंतरिक्ष विभाग के तहत सैकड़ों पदों पर सरकारी नौकरी देने जा रही है। केंद्र सरकार की ये नौकरियां भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रोपलशन कॉम्प्लेक्स के लिए दी जा रही है। आईटीआई्, डिप्लोमा व डिग्री होल्डर इन नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकते हैं। किसी अनुभव की जरूरत नहीं है। आयुसीमा भी 35 वर्ष तक है। केंद्र सरकार की इस भर्ती की खास बात यह है कि इसके लिए कोई परीक्षा नहीं देनी है सीधे इंटरव्यू के जरिए अभ्यर्थियों का चयन होगा। उक्त उल्लेखित विषयों की परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर चयन होगा। यानी आईटीआई, इंजीनियरिंग व डिप्लोमा में जिसके जितने अधिक मार्क होंगे उनका सिलेक्शन पक्का।

इसरो की इस भर्ती में तीन पद इंजीनियरिंग के अलावा आर्ट, साइंस व कॉमर्स में ग्रेजुएट कर चुके अभ्यर्थियों के लिए भी रिक्त हैं। सभी को अलग-अलग तारीखों में तय स्थान पर पहुंचकर इंटरव्यू देने होंगे। कुल 220 पद रिक्त हैं।

रिक्त पदों की संख्या

इंजीनियरिंग ग्रेजुएट-38

आर्ट/साइंस/कॉमर्स- 03

डिप्लोमा होल्डर- 59

 आईटीआई-120

इंटरव्यू की तिथियां

इंजीनियंरिंग ग्रेजुएट-14-12-2019

टेक्नीशियन (डिप्लोमा होल्डर)-21-12-2019

आईटीआई-1-4-2019

दो पालियों में इंटरव्यू

इन तारीखों पर इंटरव्यू दो पालियों में संपन्न होंगे। पहली पाली 9 बजे से शुरू होगी तो दूसरी दोपहर 1:30 बजे से। अभ्यर्थियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन भरकर अपने संपूर्ण ओरिजनल दस्तावेजों के साथ इंटरव्यू के लिए पहुंचना होगा।डाक कुरियर व अन्य माध्यमों से भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं होंगे। अपने साथ आईडी प्रूफ रखना अनिवार्य है।

आयुसीमा-35 वर्ष, नियमानुसार छूट का प्रावधान।

इंटरव्यू का स्थान- तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में महेंद्रगिरी स्थित इसरो के प्रोपलशन कॉम्प्लेक्स

केंद्र सरकार की अप्रेंटिस आधार पर इस भर्ती का संपूर्ण विवरण प्राप्त करने के लिए क्लिक करें  Link 

आवेदन का प्रारूप प्राप्त करें

 

04-12-2019
चंद्रयान-2, नासा से पहले ही खोज लिया था विक्रम लैंडर का मलबा:  इसरो प्रमुख 

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के. सिवन ने कहा कि हमने पहले ही विक्रम लैंडर को ढूंढ लिया था। सिवन ने कहा, नासा से पहले हमारे ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर को ढूंढा था और इसकी जानकारी हमने अपनी वेबसाइट पर भी डाली थी। आप वहां जाकर देख सकते हैं। इसरो ने अपनी वेबसाइट पर 10 सितंबर को एक जानकारी अपडेट की है। इसमें लिखा है कि चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की खोज कर ली गई है, लेकिन उससे अभी तक संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। संचार स्थापित करने के लिए सभी संभावित प्रयास किेए जा रहे हैं। दरअसल, मंगलवार को  आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की ओर से जारी तस्वीरों की मदद से चेन्नई के आइटी प्रोफेशनल शनमुगा सुब्रमण्यम ने वह लोकेशन खोज ली है, जहां क्रैश होने के बाद विक्रम का मलबा पड़ा है।
 

27-11-2019
भारत ने अंतरिक्ष में लॉन्च किया सैटेलाइट 'कार्टोसैट-3', रखेगा दुश्मन की गतिविधियों पर नजर

नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष में एक और इतिहास रचा है। इसरो ने चंद्रयान 2 के बाद तीसरी पीढ़ी के उन्नत भू-सर्वेक्षण उपग्रह काटोर्सैट-3 का लॉन्च किया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक, उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी47 के जरिए काटोर्सैट-3 तथा उसके साथ 13 नैनो उपग्रहों को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र के दूसरे लॉन्च पैड से प्रक्षेपण किया गया। पीएसएलवी-सी47 प्रक्षेपण यान पीएसएलवी की एक्सएल श्रेणी की 21वीं उड़ान है। काटोर्सैट-3 तीसरी पीढ़ी का उन्नत उपग्रह है,जिसकी हाई रिजोल्यूशन इमेजिंग क्षमता है। काटोर्सैट-3 को 509 किलोमीटर की ऊंचाई पर भूमध्यरेखा से 97.5 डिग्री की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा पीएसएलवी-सी47 के जरिए अमेरिका के 13 नैनो उपग्रहों का भी प्रक्षेपण किया जाएगा,जिन्हें इसरो की व्यावसायिक इकाई न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के तहत इस अभियान में शामिल किया गया है।

काटोर्सैट-3 का वजन 1625 किलोग्राम है, जिसे 13 अन्य नैनो उपग्रहों के साथ ध्रुवीय सौर भूस्थैतिक कक्षा में प्रक्षेपित किया जाएगा। 44.4 मीटर ऊंचे पीएसएलवी-सी47 प्रक्षेपण यान का यह 49वां मिशन है। यह उपग्रह काटोर्सैट श्रृंखला का नौंवा उपग्रह है। इसरो का इस वर्ष यह पांचवां प्रक्षेपण अभियान है। कार्टोसैट-3 तीसरी पीढ़ी का बेहद चुस्त और उन्नत उपग्रह है। यह धरती की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने के साथ-साथ उसका मानचित्र तैयार करने की क्षमता रखता है। इसरो ‘कार्टोसैट-3’ सहित 13 अमेरिकी नैनो उपग्रहों की लॉन्चिंग के लिए ‘पीएसएलवी-सी47’ रॉकेट का सहारा लेगा। यह अंतरिक्ष में ‘पीएसएलवी-सी47’ की 49वीं उड़ान होगी। ‘कार्टोसैट-3’ शहरों के नियोजन, ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास, संसाधनों की आपूर्ति, तटीय भूमि के बेहतर उपयोग और हरियाली के आकलन के साथ-साथ मौसमी बदलावों का अंदाजा लगाने व सैन्य निगरानी में मददगार साबित होगा।

 

26-11-2019
कार्टोसेट-3 सैटेलाइट की श्रीहरिकोटा से लांचिंग 27 नवंबर को

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 27 नवंबर को सुबह 9.28 मिनट पर यानी 26 घंटे बाद कार्टोसेट-3 सैटेलाइट को लॉन्च करेगा। इस सैटेलाइट को श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी47 के जरिए लॉन्च किया जाएगा। पहले इसे 25 नवंबर को लॉन्च करने के लिए शेड्यूल किया गया था। लेकिन अज्ञात कारणों से इसरो ने इसकी लॉन्चिंग की तारीख को बदल दिया। इसके साथ 13 अमेरिकी सैटेलाइट भी होंगे। इसरो के अनुसार 13 अमेरिकी नैनोसैटेलाइट लॉन्च करने की डील पर पहले ही हाल ही में बनाई गई व्यवसायिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड ने की थी। कार्टोसेट-3 को 509 किलोमीटर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। एमिसैट डीआरडीओ की दुश्मनों के रडार पर नजर रखने में मदद करता है। इस ऑपरेशनल सैटेलाइट को लॉन्च करने में छह महीने की देरी चंद्रयान-2 की वजह से हुई। सूत्रों के अनुसार इस सैटेलाइट का प्रयोग खुफिया जानकारी जुटाने और सीमा पर चौकसी बनाने के लिए किया जाएगा। काटोर्सैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 0.25 मीटर यानी 9.84 इंच की ऊंचाई तक की स्पष्ट तस्वीरें ले सकता है जबकि अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ही ले सकता है। 

18-11-2019
इंदिरा गांधी की जयंती पर मुख्यमंत्री ने किया नमन

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की जयंती 19 नवम्बर के अवसर पर उन्हें सत्-सत् नमन किया। भूपेश बघेल ने कहा है कि इंदिरा गांधी ने आजीवन गरीबों और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए प्रयास किया और देश की एकता और अखण्डता की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। इंदिरा गांधी ने दूरदृष्टि और पक्के इरादे के साथ देश को नई दिशा प्रदान की। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश का कुशलतापूर्वक नेतृत्व करते हुए अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत को प्रतिष्ठापूर्ण स्थान दिलाया। उनके हरित क्रांति कार्यक्रम की सफलता ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया। प्रधानमंत्री के रुप में उन्होंने बैंकों के राष्ट्रीयकरण, राजाओं के प्रिवीपर्स की समाप्ति जैसे कठोर निर्णय लिए। बांग्लादेश का उदय, भारत का परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनना उनकी प्रमुख उपलब्धियां थी।

उनके कार्यकाल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना हुई और प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट अंतरिक्ष में छोड़ा गया। इंदिरा गांधी बचपन से देश के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहीं। उन्होंने बाल चरखा संघ की स्थापना की और असहयोग आंदोलन के दौरान बच्चों की वानर सेना बनायी। इंदिरा गांधी विभिन्न विषयों में रूचि रखने वाली और जीवन को एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखती थी, जिसमें कार्य और रूचि इसके विभिन्न पहलू है। जिन्हें किसी खंड में अलग नहीं किया जा सकता और न ही अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। उन्होंने अपने जीवन में कई उपलब्धियां प्राप्त की। 

02-11-2019
इसरो प्रमुख ने कहा, विक्रम लैंडर की कार्य योजना पर कर रहे हैं काम

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के. सिवन ने कहा है कि वे विक्रम लैंडर की लैंडिंग के लिए कार्य योजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम विक्रम लैंडर की लैंडिंग के लिए प्रौद्योगिकी प्रदर्शित करना चाहते हैं। इसरो के 50 साल पूरे होने के मौके पर सिवन ने आईआईटी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। सिवन ने कहा कि आप सभी लोग चंद्रयान-2 मिशन के बारे में जानते हैं। तकनीकी पक्ष की बात करें तो यह सच है कि हम विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं करा पाए, लेकिन पूरा सिस्टम चांद की सतह से 300 मीटर दूर तक पूरी तरह काम कर रहा था। हमारे पास बेहद कीमती डेटा उपलब्ध है। मैं भरोसा दिलाता हूं कि भविष्य में इसरो अनुभव और तकनीकी दक्षता के माध्यम से सॉफ्ट लैंडिंग का हरसंभव प्रयास करेगा। चंद्रयान-2 कहानी का अंत नहीं है। हमारा आदित्य एल 1 सोलर मिशन, ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम ट्रैक पर है। हम कई एडवांस सैटेलाइट्स को लॉन्च करने वाले हैं। एसएसएलवी दिसंबर-जनवरी में उड़ान भरेगा। 200 टन सेमी-क्रायो इंजन की टेस्टिंग और मोबाइल पर एनएवीआईसी सिग्नल भेजने पर भी जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा। 

18-10-2019
आईआईआरएस पेलोड ने किया कमाल, ली चांद के सतह की पहली चमकदार तस्वीर

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 ने चांद की सतह की पहली चमकदार तस्वीर ली है। यह तस्वीर चांद के उत्तरी हिस्से की है। यह कमाल चंद्रयान-2 पर पर लगे इमेजिंग इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर(आईआईआरएस) पेलोड ने किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बीते गुरुवार को संयोगवश करवाचौथ के दिन चांद की सतह की यह तस्वीर ट्विटर पर साझा की है। इस स्पेक्ट्रोमीटर को इस तरह से डिजाइन किया गया है जिससे वह चंद्रमा की सतह से परावर्तित होने वाले सूर्य के प्रकाश को माप सके और चांद की सतह पर मौजूद खनिजों का पता लगा सके। तस्वीर में चांद की सतह पर कुछ महत्वपूर्ण समरफील्ड, स्टेबिंस और किर्कवुड गड्ढे नजर आ रहे हैं।

इससे पहले 4 अक्तूबर को इसरो ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे से ली गई तस्वीर जारी की थी। हालांकि, वह स्पष्ट नहीं थी। चंद्रयान-2 को सात सितंबर को चांद के दक्षिणी सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, लेकिन आखिरी क्षणों में इसरो का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया। हालांकि, चांद के आसमान में चक्कर लगा रहे चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर मुस्तैदी से काम कर रहा है। वहीं, विक्रम की तलाश इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी कर रहा है।

यह है मकसद

आईआईआरएस का मुख्य मकसद चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास के बारे में पता लगाना है। इसे सतह पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी और परावर्तित किरणों के आकलन के जरिये अंजाम दिया जाता है। इस दौरान चांद के निर्माण में खनिजों और तत्वों का भी विश्लेषण किया जाता है।

तस्वीर का आकलन कुछ ऐसे

सूर्य की परावर्तित रोशनी अलग-अलग जिन गड्ढों से गुजरी, उनके नाम दिए गए हैं। जैसे गड्ढे का मध्यवर्ती स्थान (स्टेबिंस), गड्ढे की सतह (स्टेबिंस और समरफील्ड), बडे़ गड्ढे के भीतर बने छोटे गड्ढे (समरफील्ड) और गड्ढों के अंदरूनी घेरा(किर्कवुड)। इन्हीं गड्ढों पर पड़ी रोशनी और उसके अलग-अलग रंगों के परावर्तन से सतह का शुरुआती आकलन किया गया है।

 

04-10-2019
अब अंतरिक्ष में होगा भारत का स्पेस स्टेशन, इसरो प्रमुख ने दी जानकारी

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस समय एक साथ कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। एक तरफ जहां वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रयान-2  के विक्रम लैंडर से संपर्क की कोशिश में हार नहीं मानी है। वहीं दूसरी ओर भारत के पहले मानव मिशन गगनयान की भी तैयारी जारी है। इस बीच अब इसरो प्रमुख के. सिवन ने एक और बड़े प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी है। यह ऐसा है जो इसरो ने पहले कभी नहीं किया। डॉ. के. सिवन ने अंतरिक्ष में भारत के अपने स्टेशन के बारे में बात की है। कुछ महीने पहले के. सिवन ने बताया था कि भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाने वाला है। अब इसके लिए इसरो अगले साल स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट करने जा रहा है।

कैसा होगा ये प्रयोग

इस प्रयोग के लिए इसरो दो सैटेलाइट्स को एक पीएसएलवी रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजेगा। ये दो सैटेलाइट मॉड्यूल इस तरह तैयार किए जाएंगे, कि ये अंतरिक्ष में रॉकेट से बाहर आने के बाद एक दूसरे से जुड़ सकें। यही सबसे जटिल प्रक्रिया भी होगी।

स्पेस स्टेशन के लिए क्यों जरूरी है ये प्रयोग

इसरो प्रमुख के अनुसार जुड़ने की ये प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसे इमारत बनाने के लिए एक ईंट से दूसरी ईंट को जोड़ना। छोटी-छोटी चीजें जुड़कर बड़ा आकार बनाती हैं। स्पेस स्टेशन बनाने के लिए भी ये प्रक्रिया सबसे अहम है। इस प्रयोग की सफलता से ही पता चलेगा कि हम स्पेस स्टेशन में जरूरी वस्तुओं और अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित तरीके से पहुंचा सकेंगे या नहीं। बता दें कि पहले 2025 तक ये रॉकेट छोड़ने की योजना थी।

ISS बनाने में कितना समय लगा था

इस वक्त इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) कार्य कर रहा है जिसे पांच देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों ने मिलकर बनाया है - अमेरिका (NASA), रूस (ROSCOSMOS), जापान (JAXA), यूरोप (ESA) और कनाडा (CSA)। इन सभी को मिलकर आईएसएस बनाने में करीब 13 साल लगे थे। इसके लिए भी डॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। ISS के लिए कुल 40 बार डॉकिंग की गई थी। इसरो प्रमुख ने कहा है कि स्पेस स्टेशन के लिए स्पेडेक्स पहले करने का मतलब ये नहीं कि हम गगनयान को टालेंगे। गगनयान दिसंबर 2021 में ही होगा। स्पेस स्टेशन के लिए स्पेडेक्स एक प्रायोगिक मिशन है। इस प्रयोग की सबसे जटिल प्रक्रिया होगी अंतरिक्ष में दो सैटेलाइट्स की गति कम कर उन्हें एक-दूसरे से जोड़ना। क्योंकि अगर गति कम नहीं हुई, तो वे आपस में टकरा जाएंगे। इस प्रयोग के लिए इसरो को सरकार ने फिलहाल 10 करोड़ रुपये दिए हैं। 

02-10-2019
इसरो वैज्ञानिक की हत्या, जांच में जुटी पुलिस

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) से जुड़े एक वैज्ञानिक की उनके अपार्टमेंट में ही हत्या कर दी गई। वैज्ञानिक एस. सुरेश की किसी अज्ञात आदमी ने हैदराबाद के बीचोंबीच अमीरपेट इलाके में स्थित अन्नपूर्णा अपार्टमेंट के उनके फ्लैट में हत्या कर दी। उस समय केरल निवासी वैज्ञानिक अपने फ्लैट में अकेले ही थे। बताया जा रहा है कि मंगलवार को कार्यालय नहीं पहुंचने पर उनके साथियों ने उनके मोबाइल पर फोन किया। उत्तर नहीं मिलने पर उन्होंने उनकी पत्नी इंदिरा को सूचना दी। उनकी पत्नी चेन्नई में बैंक कर्मचारी हैं। अपने परिवार के सदस्यों के साथ इंदिरा हैदराबाद पहुंचीं और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। फ्लैट का दरवाजा तोड़ अंदर पहुंचने पर सुरेश को मृत पाया गया। पुलिस को संदेह है कि उनके सिर पर किसी भारी चीज से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। मौके से पुलिस ने सुराग जुटाए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का मुआयना किया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वे अपार्टमेंट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को देख रहे हैं। सुरेश 20 साल से हैदराबाद में रह रहे हैं। उनकी पत्नी भी साथ ही रहती थी, लेकिन 2005 में उनका तबादला चेन्नई हो गया था।

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