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24-10-2020
करोड़ों की ठगी के मामले में एक एएसआई निलंबित

रायपुर/जगदलपुर। जिले में निर्माणाधीन एनएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट में नौकरी दिलाने के नाम पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी करने के मामले में कोतवाली पुलिस ने बचेली निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं इस मामले में बस्तर जिले के एसपी दीपक झा ने एक एएसआई यतेंद्र देवांगन को निलंबित कर दिया है।
उल्लेखनिय है कि वर्ष 2017 में स्थानीय बेरोजगारों को एनएमडीसी में नौकरी दिलाने के नाम पर बचेली निवासी नवीन चौधरी, संजय डोनाल्ड दयाल, नरेंद्र चौधरी और चन्द्रकिरण ओगर द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों के लगभग 119 लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी करने के बाद फरार हो गए थे। इसके बाद पीड़ित यास्मीन अंसारी निवासी भानपुरी तथा सुनील देवांगन ने ठगी के मामले को लेकर कोतवाली थाने में आरोपियों के विरूद्ध मामला दर्ज कराया था। पुलिस को बीते 19 अक्टूबर को बचेली निवासी दो आरोपी नरेंद्र चौधरी और संजय डोनाल्ड दयाल को पड़ने में सफलता मिली थी। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस के सामने कई खुलासे किए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 120 (बी), 467, 468, 471 भादवि के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जेल भेज दिया है। इसके साथ ही पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।

21-10-2020
स्टील प्लांट के डी-मर्जर को लेकर मुख्यमंत्री से मिले विभिन्न संघ-संगठनों के पदाधिकारी

रायपुर/जगदलपुर। बस्तर जिला मुख्यालय अंर्तगत एनएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट के डी-मर्जर को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजीव शर्मा के नेतृत्व में जनप्रतिनिधिगण, मजदूर यूनियन, ट्रेड यूनियन, सहित विभिन्न संघ संगठनों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सीएम हाऊस में मिलकर कर इस गम्भीर विषय पर विस्तृत चर्चा की और इस पर पहल करने का अनुरोध किया है। इस दौरान कांग्रेस नेताओं सहित ट्रेड यूनियन/स्टील श्रमिक यूनियन/एआईटीयूसी यूनियन/संयुक्त इस्पात मजदूर संघ/अजा/अजजा कल्याण समिति आदि संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। राजीव शर्मा ने कहा कि एनएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण होने का मतलब यहां के बेरोजगार युवाओं/प्रभावित किसानों को धोखा देने के समान है। उन्होंने कहा कि नगरनार स्टील प्लांट के एनएमडीसी के डी-मर्जर को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद क्षेत्रवासियों में विरोध के स्वर ऊचें होने लगे हैं। कांग्रेस सदन से सड़क तक कि लड़ाई के लिए तैयार है।

17-10-2020
50 लाख की ठगी करने वालों में से दो आरोपी अब भी फरार

रायपुर/जगदलपुर। जिले में स्थापित नगरनार स्टील प्लांट में नौकरी लगाने के नाम पर 50 लाख की ठगी करने के आरोप में कोतवाली पुलिस में विभिन्न धाराओं के तहत धरमपुरा निवासी महिला  सहित बचेली निवासी नरेंद्र चौधरी और संजय दयाल के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध किया था। इसके बाद पुलिस टीम ने नरेंद्र चौधरी को गिरफ्तार किया था, लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी कोतवाली पुलिस अब तक बाकी दो आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। इसकी पुष्टि कोतवाली थाना प्रभारी एमन साहू ने किया है। मिली जानकारी के अनुसार ठगी का मामला तकरीबन एक करोड़ से ऊपर के धोखाधड़ी का है, जिसमें शहर के और कई नामचीन चेहरे उजागर हो सकते हैं। आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर के बाद यह बात भी चर्चा में थी कि बैंक के माध्यम से भी कई लोगों के पैसों की लेनदेन हुई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही मामले उजागर होंगे।

14-10-2020
केन्द्र सरकार के फैसले से भूमि विस्थापितों और बस्तर की जनता के तमाम सपने चकनाचूर : शैलेश 

रायपुर। नगरनार स्टील प्लांट को एनएमडीसी से अलग करने और बेचने की तैयारी करने के फैसले को कांग्रेस ने बस्तर और छत्तीसगढ़ की जनता के साथ छल करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने  कहा है कि यह छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों पर बालको के बाद एक और खुली डकैती की घटना है,इसका जवाब जनता देगी। उन्होंने कहा है कि नगरनार स्टील प्लांट के लिए जमीन देने वाले भूमि विस्थापितों के अलावा बस्तर की जनता के तमाम सपने केंद्र सरकार के इस फैसले से चकनाचूर हो गए। नगरनार प्लांट के निजीकरण से छत्तीसगढ़ के और खासकर बस्तर के अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग और गरीब लोगों की नौकरी पाने की उम्मीदों को धक्का लगा है। अभी छत्तीसगढ़ के लोग बालको को बेचने को भूले नहीं है। जब बालको को एनडीए की सरकार ने 500 करोड़ रुपए में निजी हाथों में सौंप दिया गया था। जबकि बालको के अंदर उपलब्ध स्क्रैप का मूल्य ही इससे कहीं ज्यादा था। नगरनार के निजीकरण से बस्तर और छत्तीसगढ़ के विकास का केंद्र सरकार का वादा खत्म हो जाएगा। नगरनार स्टील प्लांट अब निजी हाथों में जाकर किसी उद्योगपति के लिए लाभ कमाने की संस्था बनेगा। अब छत्तीसगढ़ से संसद में चुनकर गए सांसदों और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को बताना चाहिए कि वे केंद्र में बैठी भाजपा सरकार के इस फैसले पर क्या सोचते हैं? क्या वे बस्तर की जनता के साथ खड़े होकर नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण का विरोध करेंगे? या फिर नरेंद्र मोदी के डर से चुप्पी साधे बैठे रह जाएंगे? छत्तीसगढ़ की जनता प्रदेश के भाजपा नेताओं की चुप्पी को देख रही है और इसका मतलब भी समझ रही है।

16-09-2020
फूलोदेवी नेताम ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री को लिखा पत्र, नगरनार स्टील प्लांट के संबंध में पुनर्विचार करने किया आग्रह

रायपुर। सांसद फूलोदेवी नेताम ने नगरनार इस्पात संयंत्र के संबंध में इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को पत्र लिखा है। सांसद ने लिखा है कि, भारत सरकार इस्पात मंत्रालय के अधीन नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम एनएमडीसी लिमिटेड की ओर से लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत पर बस्तर में नगरनार स्टील प्लांट लगाया जा रहा है। अभी यह प्रोजेक्ट पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन केन्द्र सरकार ने बस्तर के इस स्टील प्लांट का निजीकरण करने का निर्णय कर लिया है।

यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि, छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावित स्टील प्लांट का निजीकरण किया जा रहा है। इससे लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचा है। आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहे हैं। सांसद ने सरकार से आग्रह किया है कि, केन्द्र सरकार नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुन: विचार करें और इसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में ही बनाए रखा जाए।

27-08-2020
भूपेश बघेल ने कहा-नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार करें केंद्र सरकार

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुनः विचार करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि, इस औद्योगिक इकाई के शुभारंभ होने से क्षेत्र में हजारों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होने की संभावनाओं से गौरान्वित महसूस कर रहे थे। विगत दिनों जानकारी प्राप्त हुई है कि केन्द्र सरकार बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट को निजी लोगों के हाथों में बेचने की तैयारी में है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावित स्टील प्लांट का निजीकरण किया जाए। केन्द्र सरकार के इस कदम से लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचेगा। भारत सरकार के इस प्रकार फैसले से आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहे हैं। इनके मध्य शासन-प्रशासन के विरुद्ध असंतोष की भावना व्याप्त हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखा कि, आप इस बात से भली-भांति अवगत होंगे कि राज्य शासन काफी अथक प्रयासों से नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफल हुई है। इन परिस्थितियों में नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण होने से नक्सलियों की ओर से आदिवासियों के असंतोष का अनुचित लाभ उठाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अवगत कराया है कि नगरनार स्टील प्लांट के लिए लगभग 610 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की गई है, जो ’सार्वजनिक प्रयोजन’ के लिए ली गई है।

इसके साथ ही नगरनार स्टील प्लांट में लगभग 211 हेक्टेयर सरकारी जमीन आज भी छत्तीसगढ़ शासन की है। इसमें से केवल 27 हेक्टेयर जमीन 30 वर्षों के लिए सशर्त एनएमडीसी को दी गई है, बाकी पूरी शासकीय जमीन छत्तीसगढ़ शासन के स्वामित्व की है और राज्य शासन ने जो जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित की है। उसकी पहली शर्त यही है कि उद्योग विभाग की ओर से भूमि का उपयोग केवल एनएमडीसी स्टील प्लांट स्थापित किए जाने के प्रयोजन के लिए ही करेगी। मुख्यमंत्री बघेल ने यह भी अवगत कराया है कि विगत माह ही राज्य शासन की ओर से एनएमडीसी का बैलाडिला स्थित 4 लौह अयस्क के खदानों को आगामी 20 वर्ष की अवधि के लिए विस्तारित किया गया है। इससे कि बस्तर क्षेत्र में रोजगार के नित नए अवसर सृजित होते रहें। इस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास को बढ़ावा मिले और यहां की जनता विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकें। मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि,केन्द्र सरकार निर्णय पर पुनः विचार करें और इसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में यथावत प्रारंभ कर कार्यरत रहने दें। ताकि बस्तर क्षेत्र के आदिवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में आधारभूत मदद मिल सके।

 

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