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23-10-2020
फूलोदेवी ने कहा-महिलाओं के हित का दिखावा करने वाली भाजपा नेत्रियां बढ़ती महंगाई पर मौन क्यों ?

रायपुर। राज्यसभा सांसद व महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम ने महंगाई को लेकर केन्द्र सरकार पर करारा हमला किया है। उन्होंने कहा है कि  प्याज व खाद्य सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से महिलाएं बहुत चितिंत और परेशान है। महंगाई ने जनता की कमर तोड़ रखी है। पहले से ही महंगाई की म़ार से जनता हताश है और अब प्याज भी रूलाने लगा है। बेताहाशा दामों में वृद्धि होने से जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। नरेन्द्र मोदी के काले कानून के कारण जमाखोरी से प्याज के दाम 80 से 100 रुपए हो गए हैं। हिटलरशाही के जैसे जो मन में आया बिना सोचे समझे नियम लागू कर देते हैं। इसका खमियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।  महिलाओं के हित के चिंतन के दिखावा करने वाली भाजपा नेत्रियां बढ़ती महंगाई पर मौन क्यों है ?फूलोदेवी नेताम ने कहा है कि जब-जब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब-तब महंगाई ने हाहाकार मचाया है।

नरेद्र मोदी तो चिल्ला-चिल्ला कर कहते थे कि बहुत हुई महंगाई की मार अब मोदी की सरकार। बढ़ती महंगाई ने जहां गरीब, दाल-रोटी से मोहताज हो रहा है, वही प्याज के बढ़ते दामों से गरीब तो क्या मध्यम वर्ग के बजट से भी बाहर हो गया है। महंगाई कम करने का वादा करने वाले मोदी की इस महंगाई पर चुप्पी से जनता डर गई है। सामने त्यौहार है,आमदनी कुछ  नहीं और खर्च रुपया। वित्त मंत्री प्याज नहीं खाती, मगर वो जो खाती है वो आम जनता के थाली से कोसों दूर है। नरेंद्र मोदी  गृहस्थी नहीं चलाते, उन्हें महंगाई से कोई मतलब नहीं। सीतारमण जी वित्त मंत्री होने के साथ एक महिला भी है। फूलोदेवी ने वित्त मंत्री से निवेदन किया है कि महंगाई बेलगाम होती जा रही है। महंगाई कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं,जिनसे जनता भी दो वक्त की रोटी चैन से खा सके।

21-10-2020
भूपेश सरकार की पहल से कई फायदे,एथेनॉल प्लांट से गन्ना उत्पादक किसानों को भी होगा लाभ,खुलेंगे रोजगार के अवसर

रायपुर। प्रदेश की भूपेश सरकार की पहल से किसानों को आर्थिक लाभ के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में बड़ी संख्या में एथेनॉल प्लांट लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि प्लांट लगाने 4-6 फैक्ट्रियों के साथ एमओयू भी हो गया है। जमीन तलाशी जा रही है, संभवत: अगले वर्ष तक प्लांट शुरू हो जाएंगे। भूपेश सरकार की इस पहल से कई फायदे होंगे। राज्य शासन की केन्द्र सरकार से मांग है कि किसानों से खरीदे अतिरिक्त धान को सीधे तौर पर एथेनॉल संयत्रों को ईधन उत्पादन के लिए विक्रय की अनुमति प्रदान की जाए।जैव-एथेनॉल उत्पादन आज के समय की जरूरत है। ऐसे में राज्य में भी जैव-इथेनॉल संयंत्र की स्थापना महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। राज्य में गन्ने की खोई और धान की पर्याप्त उपलब्धता हैै। जैव-इथेनॉल का उत्पादन शुरू करना इसलिए भी एक लाभदायक विकल्प है, क्योंकि केंद्र सरकार उच्च मूल्य पर जैव ईंधन का आयात कर रही है।

जैव-इथेनॉल उत्पादन से न केवल विदेशी धन की बचत होगी, बल्कि कृषि क्षेत्र का भी विकास किया जा सकेगा।गन्ने और फसल अवशेष से ईंधन उत्पादन न केवल किसानों को अतिरिक्त आमदनी उपलब्ध कराएगा, बल्कि पराली के सुरक्षित निपटान से पर्यावरण को बेहतर करने में मदद मिलेगी। जैव ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों की आय बढ़ेगी और राज्य में रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। राज्य में उत्पादित अतिरिक्त धान से बायो-एथेनॉल उत्पादन की अनुमति के लिए राज्य सरकार की ओर से निरंतर  प्रयास किए जा रहे थे। शासन के इन प्रयासों के फलस्वरू छात्तीसगढ़ में अधिशेष चावल से एथेनॉल उत्पादन की दर 54 रुपए 87 पैसे प्रति लीटर निर्धारित की गई है। एथेनॉल ईंधन के रूप प्रयोग किया जाता है। यह रासायनिक रूप से एथिल अल्कोहल ही है, जो सामान्य तौर पर एल्कोहलिक पेयों में पाया जाता है।

जैव एथेनॉल, गन्ने के रस जैसे जैविक चीजों से प्राप्त किया जाता है। एथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिलाकर मोटर वाहनों के ईंधन के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। एथेनॉल को ब्राजील, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में बड़े पैमाने में पेट्रोल में मिलाया जाता है। इसे वाहनोें के ईंधन मे 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक मिलाया जाता है।एथेनॉल पेट्रोल की ज्वलनशीलता बढ़ाता है। एथेनॉल मिलाने पर पेट्रोल की दक्षता बढ़ जाती है। इससे पेट्रोल का दहन इंजन में बेहतर तरीके से होता है और निकलने वाला धुआं भी कम प्रदूषण करता है। इसके इस्तेमाल से प्रदूषण कम होता है यानी इसका इस्तेमाल कर पर्यावरण को होने वाला नुकसान भी कम किया जा सकता है।

 

21-10-2020
Breaking: छत्तीसगढ़ विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र 27 और 28 अक्टूबर को, अधिसूचना जारी

रायपुर। आखिरकार राजभवन और भूपेश सरकार के मध्य सहमति बन गई है। इसके बाद ही विधानसभा सचिवालय ने विशेष सत्र के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। छत्तीसगढ़ सरकार केन्द्र सरकार के कृषि कानूनों से अलग प्रदेश के किसानों के लिए कानून बनाने जा रही है। इसकी घोषणा कैबिनेट की बैठक के बाद कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने मीडिया के समक्ष की थी। इसके बाद से प्रदेश में राजनीतिक गलियारे में काफी गहमा-गहमी का माहौल था। एक ओर प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार के कृषि कानूनों को किसान विरोधी बता कर विरोध कर रही है तो दूसरी ओर प्रदेश सरकार को घेरने विपक्ष कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। कैबिनेट की बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र के ऐलान के बाद से विपक्षी पार्टी भाजपा की ओर से प्रदेश सरकार को घेरना शुरू हुआ। विपक्षी नेता राजभवन कूच किए। लगातार विशेष सत्र की अनुमति नहीं देने की मांग की गई। गत दिन ही राज्यपाल ने फाइल लौटाई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारवार्ता में कहा था कि राज्यपाल से फिर बात की जाएगी। इस सबके बीच बुधवार को विधासभा सचिवालय से जारी अधिसूचना ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले को लेकर जारी तकरार थम गई है। विधानसभा का विशेष सत्र इस माह की 27 और 28 तारीख को होगा। इसकी तैयारी विधानसभा सचिवालय ने शुरू कर दी है। प्रमुख सचिव विधानसभा चंद्रशेखर गंगराड़े ने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ की पांचवी विधानसभा का आठवां सत्र होगा। पूरे सत्र में दो बैठकें होगी। इस सत्र में शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।

 

 

21-10-2020
सेब से भी महंगा बिक रहा प्याज, विकास उपाध्याय ने कार्रवाई करने कलेक्टर को दिए निर्देश

रायपुर। संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा है कि केन्द्र सरकार मंहगाई को काबू कर पाने पूरी तरह से विफल साबित हो रही है। रायपुर में पिछले 2 दिनों से सेब से महंगा प्याज बिक रहा है। इससे पूरी जनता त्रस्त है। विकास ने केन्द्र सरकार से पूछा है कि मोदी सरकार छत्तीसगढ़ और देश के दूसरे हिस्सों में प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए अभी तक क्या कदम उठाए हैं? स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि केन्द्र की इन्हीं विफलताओं को छुपाए रखने छत्तीसगढ़ की पूरी भाजपा तांडव नृत्य कर जनता के मजबूरी का मजा ले रही है।
विकास उपाध्याय ने कहा है मोदी सरकार जिस महंगाई को कम करने की बात कर सत्ता में आई, वही महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले 2 दिनों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में प्याज के दाम सेब की कीमत से भी ज्यादा में बिक रहे हैं। उन्होंने कहा महाराष्ट्र,  राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक में फसल को भारी नुकसान हुआ है। इसलिए व्यापारियों ने जमाखोरी शुरू कर दी है, पर केन्द्र सरकार जमाखोरी रोक नहीं पा रही है। विकास उपाध्याय ने आशंका जाहिर की है कि नई फसल फरवरी में आएगी, तब तक प्याज की कीमत कम होगी लग नहीं रही है। इसलिए कि मोदी सरकार जमाखोरों को खुली छूट दे रखी है। विकास उपाध्याय ने कहा है कि कोरोना काल के लॉक डाउन का समय गुजर जाने के बाद अब मार्केट पूरी तरह खुल चुके हैं। होटल, ढाबे भी अब शुरू हो चुके हैं। इस वजह से भी प्याज की डिमांड बढ़ी है, जिसका फायदा जमाखोर पूरी तरह से उठा रहे हैं। विकास उपाध्याय ने रायपुर कलेक्टर से कहा है कि राजधानी रायपुर के ऐसे संभावित ठिकानों में छापामार कार्रवाई कर उन जमाखोरों को बेनकाब किया जाए जो परिस्थितियों का नाजायज फायदा उठा कर आम जनता को महंगाई के मुंह में ढकेलने लिप्त हैं।

20-10-2020
Video: केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ को लाभ देना चाहती है तो बायो एथेनॉल प्लांट लगाए : रविन्द्र चौबे

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत और ग्रामोद्योग मंत्री गुरू रूद्र कुमार की उपस्थिति में मंगलवार को पत्रकारवार्ता ली। पत्रकारवार्ता में मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि केन्द्र सरकार ने धान से एथेनॉल बनाने की स्वीकृति दी है। सोमवार को भी भाजपा कार्यसमिति की वर्चुअल मीटिंग में केन्द्रीय मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने भी इस बात का जिक्र किया। धान पर आधारित बायो एथेनॉल की स्वीकृति केंद्र सरकार देने जा रही है। मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बधाई के पात्र हैं। प्रदेश सरकार ने इसके लिए रास्ता निकाला कि कैसे अपने धान का उपयोग करें। सरकार ने गरीबी योजनाओं के लिए उपयोग किया, फिर भी हमारे पास पर्याप्त धान बचा। इस बार भी धान का उत्पादन अधिक होने वाला है। जब केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ को सीधा लाभ देना चाहती है तो बायो एथेनॉल प्लांट लगाएं। केवल बात करने से, केवल घोषणा करने से कुछ  नहीं होगा। मंत्री चौबे ने कहा कि केन्द्र ने 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की लेकिन 20 नया पैसा किसी को प्राप्त नहीं होने वाला।

 

20-10-2020
भूपेश बघेल ने कहा-भले कोई अपनी पीठ थपथपा ले, प्रयास हमने किया और सफल हुए, बड़ी संख्या में लगाएंगे एथेनॉल प्लांट 

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकारवार्ता ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने धान से एथेनॉल बनाने फैक्ट्रियों से एमओयू कर लिया है। प्लांट लगाने जमीन तलाश की जा रही है, अगले साल तक कार्य शुरू होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ,उनके मंत्री, भाजपा भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हैं तो थपथपा ले, लेकिन सच तो यह है कि हमने प्रयास किया। फरवरी 2019 से हमने प्रयास किया, हमने निरंतर डेढ़ साल प्रयास किया। इसमें हमें सफलता मिली है। ये संभव हो पाया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहा कि हमें केंद्र का पत्र मिला, कहा गया कि जहां बोनस दिया जाएगा वहां धान खरीदी नहीं करेंगे। इस स्थिति में हमने सोचा कि धान का दूसरा उपयोग क्या है। हमने एक कार्यशाला रखी और विस्तृत चर्चा हुई। लगातार कोशिश किए और भारत सरकार को पत्र लिखा कि हमें धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति दी जाए। केन्द्रीय कृषि ,खाद्य और पेट्रोलियम मंत्री को पत्र लिखा। तब जाकर स्थिति बनी और अनुमति मिली। फिर बात आई कि इसका रेट क्या होगा, फिर लगातार प्रयास, आग्रह और दबाव डाला। आखिरकार फिर रेट की बात तय हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम धान के साथ ही गन्ना से भी छत्तीसगढ़ में एथेनॉल बनाएंगे। केन्द्र सरकार कृषि विरोधी कानूनों से मंडी खत्म करना चाहती है, किसानों को खत्म, एमएसपी खत्म करना चाहती है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली बंद करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि ऐसे स्थिति में हम किसानों के हित में छत्तीसगढ़ में बड़े स्तर पर प्लांट लगाएंगे। उन्होंने कहा कि हमने कहा कि यदि हिन्दूस्तान में इसका उत्पादन होगा तो विदेशी धन बचेगा। अनाज सड़े उसके बजाए एथेनॉल बन जाए, किसानों को रेट मिलेगा, नए उद्योग खुलेंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा।

12-10-2020
प्रदेश सरकार ने लिया फैसला, किसानों के हित के लिए बनेगा नया कानून

रायपुर। केन्द्र सरकार के लाए गए नए कृषि सुधार और श्रम कानूनों पर  सोमवार को कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय हाईपावर कमेटी की बैठक हुई। बैठक में केन्द्र सरकार के लाए गए कानूनों से छत्तीसगढ़ के किसानों, गरीबों, मजदूरों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों और हितों की रक्षा कैैसे की जा सकती है। इस संबंध में विचार-विमर्श हुआ। हाईपावर कमेटी में केन्द्र सरकार के द्वारा लाए गए नए कानूनों से छत्तीसगढ़ के लोगों के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा के माध्यम से कानून बनाने पर भी प्रारंभिक चर्चा हुई। कृषि मंत्री ने कहा कि संविधान में कृषि राज्य सरकार का विषय है। इस पर कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकार का है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में किसानों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार निरंतर कदम उठा रही है। किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। रविंद्र चौबे ने कहा कि केन्द्र के कृषि कानून से यदि प्रदेश की धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित होती है तो नया कानून बनाकर किसानों के धान खरीदने की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में विधि एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन और श्रम मंत्री डॉ.शिवकुमार डहरिया, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह टेकाम, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अमरजीत भगत सहित संबंधित विभागों के सचिव भी शामिल हुए। हाई पावर कमेटी के सदस्यों ने विचार विमर्श में कहा कि केन्द्र सरकार के नए कानूनों से कृषि व्यवस्था में पूंजीपतियों का नियंत्रण बढ़ने के साथ ही महंगाई बढ जाएगी। समर्थन मूल्य में धान खरीदी और सार्वभौम पीडीएस प्रणाली में एक रूपए में गरीबों को चांवल वितरण भी प्रभावित होगा।

किसानों की स्थिति अपने खेत में ही मजदूरों जैसी हो जाएगी इसलिए इन कानूनों से किसानों, उपभोक्ताओं और मजदूरों के शोषण से बचाने की जरूरत है। बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि छत्तीसगढ़ के हितों की रक्षा के लिए संविधान के दायरे में रहकर विधि सम्मत कानून बनाया जाए, इसके लिए विधानसभा का विशेष सत्र आहूत की जाए। बैठक में केन्द्र सरकार के नए कानूनों से प्रदेश के किसानों, मजदूरों और गरीबों पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा हुई। चर्चा में कृषि सेक्टर में बड़ी कम्पनियों और कार्पोरेट जगत के लोगों की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ के किसानों विशेष कर छोटे और मध्यम किसानों के हितों की रक्षा कैसे की जाए। इनके हितों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ में कानून बनाए जाने की स्थिति में क्या-क्या प्रावधान रखा जाए। किसानों को अपना माल देश भर में बेचने का अनुभव नहीं है। ऐसी स्थिति में ट्रेडिंग कैसे कर पाएंगे, उनके हितों की रक्षा कैसे हो पाएगी। हाईपावर कमेटी में इस पर जोर दिया कि प्रदेश के किसानों को उनकी उपज के क्रय-विक्रय में कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। उन्हें उपज का वाजिब मूल्य मिलना चाहिए। बैठक में केन्द्र सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत व्यापारियों को भण्डारण की क्षमता असीमित किए जाने से गरीब उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों की भी चर्चा हुई।  कमेटी के सदस्यों ने उपभोक्ताओं को सुगमता पूर्वक और सही कीमत पर आवश्यक वस्तु उपलब्ध हो, इस पर बल दिया।

हाई पावर कमेटी की बैठक में केन्द्र सरकार के श्रम कानून में बदलाव के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। कारखाना मालिकों, संस्थाओं द्वारा श्रमिकों के हित में क्या-क्या कार्य किया जाना चाहिए सहित विभिन्न मुद्दो पर चर्चा की गई। इस मौके पर कृषि सचिव डॉ.एम. गीता, खाद्य सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, सहकारिता सचिव आर प्रसन्ना, सचिव श्रम अन्बलगन पी., विधि विभाग के प्रमुख सचिव  एन.के.चंद्रवंशी और श्रमायुक्त एल.एक्स मेनन, प्रबंध संचालक मण्डी बोर्ड हिमशिखर गुप्ता सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


 

 

10-10-2020
शैलेश ने कहा-तीन काले कानूनों के विरोध में कांग्रेस की पत्रिका में सारे सवालों के जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को केन्द्र सरकार के तीन कानूनों पर एक पुस्तिका का विमोचन किया। इस पुस्तिका में उन सभी सवालों के जवाब है जो किसानों, मजदूरों और आम जनता में उठ रहे हैं। संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों व वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने कांग्रेस की पत्रिका का विमोचन किया। इस पुस्तिका में बताया गया है कि कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही है और क्यों जनता को इन काले कानूनों का विरोध करना चाहिए। 
शैलेश ने कहा है कि इस पुस्तिका में-क्या इस कानून से कृषि उपज मंडियां खत्म हो जाएंगी ? मंडी और समिति खत्म होने से क्या नुकसान है? क्या किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा ? समर्थन मूल्य पर सबसे बड़ा झूठ क्या है? क्या समर्थन मूल्य खत्म करने के लिए भ्रम फैला रही है मोदी सरकार? एक देश एक बाजार का दावा कितना सच है? क्या हम ठेका खेती या कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग की ओर जा रहे हैं? क्या कंपनी ठेका तय होने के बावजूद वादे से पलट सकती है? क्या बड़ी कंपनियां जमीनदार बनने जा रही है? क्या राशन कार्ड से राशन मिलना बंद हो जाएगा? बिहार में भी तो मंडियां खत्म हुई थी उसका क्या असर पड़ा? यह तीनों कानून संविधान के खिलाफ कैसे हैं?  क्या उपभोक्ता के लिए आवश्यक वस्तुएं महंगी हो जाएंगी ? जमाखोरी से ग्रामीण इलाकों पर क्या असर पड़ेगा? खेतिहर मजदूरों पर क्या असर पड़ेगा? क्या नरेंद्र मोदी विदेशी दबाव में हैं ? क्या भाजपा झूठ बोल रही है कि कांग्रेस का भी यही वादा था ? आदि सवाल हैं। 
शैलेश ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्टून के अलावा इसमें विभिन्न कार्टून लगाए गए हैं। इस पुस्तिका में इस भ्रामक प्रचार का स्पष्टीकरण भी दिया गया है कि कांग्रेस भी यही कानून बनाना चाहती थी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से इस पुस्तिका की लाखों प्रतियां प्रदेश भर में बंटवाई जाएगी। पत्रिका पढ़ने के लिए यहां क्लिक करे   

27-09-2020
Video: मुख्यमंत्री का विष्णुदेव साय को जवाब,खरीदी के बाद जरूर देंगे धन्यवाद,कांकेर की घटना पर भी बोले भूपेश

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को पत्रकारवार्ता में ग्लिब्स.इन के सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अभी तो सूचना ही आई है, अभी केन्द्र सरकार ने खरीदी नहीं की है। पहले पूरा खरीद तो ले, फिर धन्यवाद देंगे। दरअसल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ और किसानों के हित में लगातार केन्द्र सरकार को पत्र लिख रहे हैं। इस बीच केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से सैंट्रल पूल में चावल खरीदी के कोटे को बढ़ाया है। इस निर्णय का स्वागत भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने किया। साय ने कहा था कि मुख्यमंत्री बघेल राजनीतिक आग्रहों और मिथ्या प्रलाप से ऊपर उठकर, चिठ्ठी लिखकर सार्वजनिक रूप से केंद्र सरकार को धन्यवाद देने की राजनीतिक शिष्टता भी दिखाएं, यूं भी केंद्र सरकार को चिठ्ठियां लिखने में वे काफी मुस्तैदी दिखाते रहे हैं। केंद्र सरकार ने चालू खरीफ सत्र के लिए लगभग 495 लाख मीट्रिक टन चावल खरीदी का लक्ष्य रखा है। इसमें छत्तीसगढ़ से अब 43.58 लाख मीट्रिक टन के बजाय केंद्र सरकार केंद्रीय पूल में 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेगी,जो पिछले साल से 17लाख मीट्रिक टन ज्यादा है। साय ने कहा था कि केंद्र सरकार के 40 प्रतिशत ज्यादा चावल लेने के फैसले के बाद अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार किसानों का पूरा धान खरीदने के अपने वादे पर अमल करें,जो उसने प्रदेश के किसानों से किया है।

अभी केन्द्र के विधेयक चिंता का विषय
मुख्यमंत्री ने साय को जवाब देते हुए कहा कि अभी तो सूचना ही आई है। पहले केन्द्र सरकार खरीद तो ले, फिर धन्यवाद देंगे। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि केन्द्र सरकार विधेयक भी किस हिसाब से लाई है,यह चिंता का विषय है। एमएसपी कब तक रहेगा? एफसीआई कब तक रहेगा? कब तक खरीदी की व्यवस्था रहेगी? यह भी चिंता है। शांता कुमार की जो रिपोर्ट है, तीन महत्वपूर्ण फैसले एफसीआई खत्म किया जाना चाहिए। एमएसपी खत्म करके अंतर की राशि दी जानी चाहिए और तीसरा सस्ते दर पर जो अनाज उपलब्ध करा रहे हैं,गरीब परिवारों को उसे बंद कर के अंतर की राशि दे दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जो भाषण दिया है, उसमें भी यही कह रहे थे कि सारे सब्सिडी खत्म कर देना चाहिए और नगद राशि उसके खाते में डाल देनी चाहिए। तो यह क्या सही है? यह सही होगा?

कांकेर की घटना निंदनीय,जल्द लागू होगा पत्रकार सुरक्षा कानून
 मुख्यमंत्री ने कहा कि कांकेर की घटना बिल्कुल गलत है। आवेदक ने जो रिपोर्ट दर्ज कराई उसी आधार पर कार्रवाई हुई और आरोपी पकड़े गए हैं। उन्होंने कहा कि इंटक का कांग्रेस से सीधा संबंधित नहीं हैं पहली बात, दूसरी चाहे वह अपराधी जो भी हो, किसी दल से जुड़ा हो उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है। घटना कोई भी हो निंदनीय है। उन्होंने कहा है कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, यदि हो गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाएगा। जब से सरकार बनी चुनाव का दौर शुरू हुआ और उसके बाद कोरोना काल। मेरा मानना है कि शायद अंतिम प्रक्रिया में हो और जल्दी इस पर चर्चा होगी। सुझाव भी मांगे जाएंगे और फिर प्रक्रिया अनुसार लागू होगा।

27-09-2020
Video : भूपेश बघेल ने कहा- केन्द्र सरकार एक राष्ट्र एक बाजार के साथ एक दर भी लागू करें, काला कानून वापस लें

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रविवार को राजीव भवन में पत्रकारवार्ता लेकर मोदी सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कृषि विधेयकों को काला कानून कहा। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि संसद में पारित बिलों पर हस्ताक्षर ना करें। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि काले कानूून को वापस ले। एक राष्ट्र एक बाजार के साथ एक दर भी जोड़कर एक राष्ट्र एक बाजार एक दर लागू करें। स्वामीनाथम कमेटी की रिपोर्ट शब्दश: लागू करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी। हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा, किसानों के बीच जाएंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से मिले निर्देशों के अनुसार विरोध करने प्रदेश कांग्रेस ने कार्यक्रम निर्धारित किए हैं।  

भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन को दी बधाई, किए सवाल :

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को दुबारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने पर बधाई दी है। साथ ही उन्होंने भाजपा और डॉ. रमन सिंह से सवाल किए हैं। 
1. केन्द्र की ओर से किसानों को बोनस दिए जाने पर प्रतिबंध लगाए जाने का समर्थन करते हैं अथवा विरोध?
2. 2016 से 2022 की 6 वर्षों की अवधि में किसानों की आय दुगनी करने का लक्ष्य रखा गया था। 2016-2020 तक की 4 वर्षों की अवधि में किसानों की आमदनी मात्र 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। क्या प्रधानमंत्री से यह अनुरोध करेंगे कि वे आगामी 2 वर्षों में किसानों की आय दुगनी करने के लिए तत्काल आपतिक कदम उठाए?
3. यूपीए के शासनकाल में 6 वर्षों 2004-2010 के बीच खाद्यान्नों की एमएसपी मोदी के कार्यकाल के 6 वर्षों 2014-2020 की तुलना में अधिक बढ़ी थी। क्या प्रधानमंत्री से यह अपील करेंगे कि किसानों के हित का देखते हुए आगामी वर्ष में खाद्यान्नों की एमएसपी में इतनी वृद्धि करेंगे कि कम से कम यूपीए कार्यकाल से वृद्धि अधिक हो सके?
4. स्वमीनाथन समिति की ओर से लागत के डेढ़ गुना एमएसपी निर्धारित की जा रही है। क्या प्रधानमंत्री से यह अनुरोध करेंगे कि, अपने वादे के अनुसार स्वमीनाथन समिति की सिफारिशों को सही मायने में लागू करेंगे।
5. शांताराम समिति की अनुशंसा 2015 में उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला था कि केवल 6 प्रतिशत किसानों को एमएसपी का लाभ मिलता है और पीडीएस अंतर्गत 67 प्रतिशत आबादी के स्थान पर केवल 40 प्रतिशत लोगों का रियायती दर पर खाद्यान्न दिया जाना चाहिए। शांताराम समिति दर पर खाद्यान्न वितरण के स्थान पर नकद राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाए। क्या आप उक्त अनुशंसाओं का समर्थन करेंगे या विरोध?
6. शांताराम समिति की अनुशंसा है कि किसानों की उपज क्रय में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाया जाना चाहिए तथा शासन की ओर से केवल क्षतिपूर्ति की राशि किसानों को दिया जाना चाहिए। आप लोग इससे सहमत है अथवा नहीं?
7. किसानों से एमएसपी पर खाद्यान्न क्रय करने के स्थान पर प्रति हेक्टेयर 5000 रुपए से 10000 नकद सब्सिडी दिए जाने की भी अनुशंसा शांताराम समिति की ओर से की गई है। आप लोग इस तर्क से सहमत है अथवा इसके विरोध में?

27-09-2020
Video : भूपेश बघेल ने मोदी सरकार को घेरा, कृषि विधेयकों को बताया अवैधानिक और संघीय ढांचे के विपरीत

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रविवार को तीन बिंदुओं पर केन्द्र सरकार पर जमकर बरसे। राजीव भवन में पत्रकारवार्ता लेकर मुख्यमंत्री बघेल ने मोदी सरकार को घेरा। मुख्यमंत्री बघेल ने तीन बिंदूओं पहला केंद्र की ओर से कृषि पर लाए गए तीन कानून, दूसरा श्रम कानून में परिवर्तन और तीसरा शांता कुमार की रिपोर्ट पर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि जो बिल लाए गए हैं, वह भारत सरकार के अधीन ही नहीं है।

जो अभी विधेयक पारित किया गया है कृषि का वह स्पष्ट रूप से राज्य का विषय है, विधानमंडल का विषय है। लोकसभा और राज्यसभा में जो कानून पास किया गया वह अवैधानिक है, संघीय ढांचे के विपरीत है। इसीलिए बैक डोर से इसे पारित किया गया। इसका नाम भी बदल दिया गया। पत्रकारवार्ता में कैबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे, मो. अकबर, डॉ. शिव कुमार डहरिया सहित प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

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