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16-10-2020
छत्तीसगढ़ कोसा उत्पादन में अग्रणी,रेशम प्रभाग की योजनाओं से एक लाख से अधिक हितग्राही हुए लाभान्वित

रायपुर। ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ कोसा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में निरंतर बढ़ रहा है। मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने कहा कि राज्य शासन की मंशानुरूप वन आधारित ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए कोसा रेशम योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामोद्योग विभाग के रेशम प्रभाग द्वारा संचालित योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में स्थानीय ग्रामीण एवं विशेष तौर पर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ कच्चे रेशम की मांग की आपूर्ति एवं सिल्क उत्पादन बढ़ाने के लिए अधोसंरचना निर्माण करना, उत्पादकता में वृद्धि करना तथा नई तकनीक को मैदानी स्तर पर लागू किया जा रहा है। रेशम प्रभाग द्वारा संचालित समस्त योजनाओं से एक लाख 17 हजार 986 हितग्राही एवं श्रमिक लाभान्वित हुए हैं।

ग्रामोद्योग संचालक सुधाकर खलखो ने बताया कि टसर रेशम विकास एवं विस्तार योजनांतर्गत राज्य के विभिन्न जिलों में 427 टसर केन्द्र एवं स्थलों तथा प्राकृतिक वन-खण्डों में 12171 हेक्टेयर टसर खाद्य पौधों का उपयोग कर तथा साल, साजा, सेन्हा, धौवड़ा, बेर आदि द्वितीयक खाद्य पौधों पर नैसर्गिक बीज प्रगुणन कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक वन-खण्डों में 185 कैम्प का आयोजन किया गया। इसके फलस्वरूप प्रदेश में नई सरकार के गठन उपरांत 22 माह में 37 करोड़ 73 लाख नग टसर ककून उत्पादन एवं संग्रहण किया गया और उत्पादित ककून से राज्य में 671 मीट्रिक टन टसर रॉ सिल्क का अनुमानित उत्पादन हुआ है।
 
उन्होंने बताया कि मलबरी रेशम विकास एवं विस्तार योजनांतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 66 मलबरी केन्द्रों पर 588 एकड़ शहतूत पौधरोपण का उपयोग कर नई सरकार गठन उपरांत 22 माह में एक लाख 12 हजार 683 किलोग्राम मलबरी ककून उत्पादन किया गया। उत्पादित ककून से प्रदेश में 14.08 मिट्रिक टन मलबरी रॉ सिल्क का अनुमानित उत्पादन हुआ है। इसी प्रकार कोसा धागाकरण योजनांतर्गत राज्य के विभिन्न जिलों में 3649 मोटराईज्ड रीलिंग कम ट्विस्टिंग एवं स्पीनिंग तथा बुनियाद मशीनों के माध्यम से 2258 हितग्राहियों के द्वारा 87.40 लाख नग टसर ककून का उपयोग कर 5340 किग्रा टसर रॉ सिल्क एवं घींचा धागे का उत्पादन धागाकारक हितग्राहियों के द्वारा किया गया।
 

30-09-2020
बुनकरों ने आपदा को बनाया अवसर, बस्तर की 8 समितियों ने तैयार किया 25 लाख रुपए का वस्त्र

रायपुर। ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में ग्रामोद्योग ग्रामीणों के रोजगार का जरिया बना है। बुनकरों ने कोरोना संक्रमण काल की आपदा को अवसर में बदला है। बस्तर जिले की आठ बुनकर समितियों के 76 परिवारों ने 25 लाख रुपए का वस्त्र तैयार किया है। बस्तर जिले के हाथकरघा कार्यालय के सहायक संचालक ने बताया कि कावड़गांव और गारेंगा के कुल 76 बुनकर परिवार जुड़कर वस्त्र उत्पादन कर रहे हैं। समिति की ओर से 2019-20 में लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का वस्त्र उत्पादन किया गया है। समिति के बुनकर सदस्य शासकीय गणवेश, चादर, रूमाल गमछा, परंपरागत साड़ी, टॉवेल आदि बनाने में कुशल हैं।

अधिकांश बुनकर परिवार घरों में हाथकरघा स्थापित कर कृषि कार्य के साथ-साथ वस्त्र बुनाई कर आर्थिक रूप से सक्षम बन रहे हैं। इसी प्रकार लॉकडाउन काल में भी जिले के सभी बुनकर वस्त्र उत्पादन कर बुनाई में सकिय हैं। कुल 8 बुनकर समितियों के बुनकर परिवार सहकारी समितियों के माध्यम से रोजगार में जुड़े हुए हैं। जिला हाथकरघा कार्यालय, जगदलपुर की ओर से संबंधित बुनकर को समितियों माध्यम से कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, उन्नत उपकरण, बुनकर आवास, रिवाल्विंग फण्ड सहायता का लाभ दिया जा रहा है। इनकी मजदूरी का भुगतान शीर्ष बुनकर संघ, राजेन्द्र नगर रायपुर से किया जाता है। छग राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन संघ, रायपुर से नियमित धागा आपूर्ति और बुनाई मजदूरी का भुगतान होने से बुनकर आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बन रहे हैं। साथ ही विभागीय योजनाओं का लाभ प्राप्त होने से बुनकरों के आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है।

 

17-07-2020
आकांक्षी जिले में हो रहा वनोपज संग्रहण का बेहतर कार्य : गुरु रूद्रकुमार


रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में कांकेर, कोण्डागांव और नारायणपुर आकांक्षी जिले वनोपज संग्रहण का बेहतर कार्य कर रहे हैं। प्रभारी मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप आकांक्षी जिले विकास के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए महुआ की खरीदी 17 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए कर दिया है। इसका लाभ सीधे आदिवासी संग्राहक परिवारों को मिला है। लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी का दायरा भी सरकार ने बढ़ाया है। अब 31 प्रकार के लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इससे आदिवासी संग्राहक परिवारों को अब उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलने लगा है। मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने कहा कि आंकाक्षी जिलों में विकास और निर्माण के कार्य बेहतर तरीके से संचालित हो रहे है।

उन्होंने इसके लिए तीनों जिलों के अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी क्षेत्रों के विकास और यहां के लोगों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। लघु वनोपज जो आज से कुछ साल तक औने-पौने दाम पर बेचने के लिए आदिवासी विवश हुआ करते थे। प्रदेश सरकार अब उसकी खुद खरीदी समर्थन मूल्य पर करने लगी है। इससे संग्राहक के परिवारों को न सिर्फ फायदा हुआ है, बल्कि उनका उत्साह भी बढ़ा है। यही वजह है कि इस साल मात्र छह महीने की अवधि में ही लघु वनोपज संग्रहण का सालाना लक्ष्य पूरा हो गया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपजों के संग्रहण और खरीदी के मामले में देश के अग्रणी राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन द्वारा इमली ऑटी, ईमली फूल, महुआ बीज, चार गुठली, साल बीज, महुआ फूल, चरोटा बीज, हर्रा, आंवला, बायबिडिंग, बहेड़ा साबूत, शहद, कुसमी लाख, रंगीन लाख, धवई फूल, कालमेघ, नागरमोथा, जामुन बीज, बेल गुदा, कूल्लू गोंद, फूल झाड़ू, कॉच बीज, करंज बीज, कालकांगनी, कुसुम बीज, तिखुर, माहुल, भेलवा, हर्रा कचरिया, बेहड़ा कचरिया, ईमली बीज, काजू बीज, वनजीरा इत्यादि लघु वनोपज की खरीदी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किया जा रहा है। कांकेर वन वृत्त के जिला वनोपज सहकारी समिति कांकेर के अंतर्गत ग्राम स्तर के संग्रहण केन्द्रों व हॉट-बाजार स्तर के संग्रहण केन्द्रों में 11 हजार 207 संग्राहकों से 1 करोड़ 94 लाख 49 हजार 302 रुपए के लघु वनोपज खरीदे गए हैं।

इसी तरह कांकेर वन वृत्त अंतर्गत कोण्डागांव जिले के वनमण्डल केशकाल और दक्षिण कोण्डागांव को मिलाकर 99 हजार 667 संग्राहकों से 36 करोड़ 92 लाख 14 हजार 980 रुपए के लघु वनोपज खरीदे गये हैं। केशकाल वनमण्डल अंतर्गत 38 हजार 58 संग्राहकों से 15 करोड़ 45 लाख 70 हजार 525 रुपए के लघु वनोपज की खरीदी की गई है। इसी कड़ी में दक्षिण कोण्डागांव वनमण्डल अंतर्गत 61 हजार 609 संग्राहकों से 21 करोड़ 46 लाख 44 हजार 455 रुपए के लघु वनोपज खरीदे गए हैं। नारायणपुर जिले में 17 हजार 623 संग्राहकों से 5 करोड़ 85 लाख 13 हजार 488 रुपए के लघु वनोपज की खरीदी की गई है।

29-01-2020
महिला सशक्तिकरण के लिए उन्हें रोजगार से जोड़ना जरूरी : गुरु रूद्रकुमार

रायपुर। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने बुधवार को अपने शासकीय आवास सतनाम सदन (धरोहर) में महिला हितग्राहियों को ई-रिक्शा वितरित किया। मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने इस मौके पर कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार की मंशा अनुरूप महिला सशक्तिकरण के लिए अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगारोंमुखी बनाया जा रहा है। मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने शासन द्वारा संचालित योजना के तहत भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की चार महिला हितग्राहियों को ई-रिक्शा प्रदान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ महिलाओं को शासन की योजनाओं से लाभान्वित कर स्वरोजगार उपलब्ध करा कर उन्हें स्वावलंबी बना रही है। उन्होंने ई-रिक्शा की खूबियों को बताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों में संदेश जाता है। मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने इस मौके पर ई-रिक्शा को स्वयं भी चला कर देखा। इस अवसर महिला हितग्राहियों सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

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