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19-10-2020
शिशुपाल सोरी ने कहा- रमन सिंह और कौशिक को देखकर तो गिरगिट भी रंग बदलना भूल जाएगा

रायपुर। जोगी की जाति के फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के बयानों पर संसदीय सचिव एवं कांकेर विधायक शिशुपाल सोरी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि इन नेताओं के पुराने बयान और नए बयान को सामने रख दिया जाए तो गिरगिट भी रंग बदलना भूल जाएगा। सोरी ने कहा है कि जो लोग जाति को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रहे थे, वहीं बाद में जाति को लेकर राजनीतिक लेन-देन का धंधा करने लगे और अब वही लोग जाति प्रमाण पत्र रद्द होने पर आंसू बहा रहे हैं। मरवाही विधानसभा उपचुनाव में चुनाव अधिकारी के फैसले पर शिशुपाल सोरी ने पूछा है कि डॉ. रमन सिंह और धरमलाल कौशिक सिर्फ़ यह बता दें कि वे जोगी परिवार को आदिवासी मानते हैं या नहीं? अगर मानते हैं तो 2003 में जोगी की जाति को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए माफी मांगें और अगर नहीं मानते तो यह बताएं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उनकी सरकार ने इस मामले में स्पष्ट फैसला क्यों नहीं किया? क्यों ऐसा लग रहा है कि जोगी की जाति को लेकर भाजपा के भीतर ही घमासान मचा हुआ है? वे एकमत नहीं हो पा रहे हैं। एक ओर रमन सिंह और धरम लाल कौशिक हैं तो दूसरी ओर अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद में रहे नंदकुमार साय, पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर, संतराम नेताम और समीरा पैकरा जैसे भाजपा के आदिवासी नेता हैं। भाजपा के इन आदिवासी नेताओं ने हमेशा जोगी के बारे में कहा कि वे आदिवासी नहीं हैं और कभी अपना स्टैंड नहीं बदला जबकि रमन सिंह और धरम लाल कौशिक लगातार रंग बदल रहे हैं।

सोरी का आरोप है कि रमन सिंह ने मुख्यमंत्री रहते किस तरह स्वर्गीय अजीत जोगी को ब्लैकमेल किया और लेनदेन की राजनीति की यह सबको पता है। हर विधानसभा चुनाव के पहले छानबीन समिति का फैसला आने की सुगबुगाहट उठती थी। सर्व अज्ञात कारणों से छानबीन समिति की रिपोर्ट को दफन कर दिया जाता था। सोरी ने कहा है कि 13 अक्टूबर 2011 को सर्वोच्च न्यायालय ने बिलासपुर कलेक्टर जिस मामले में शासन का पक्ष रख रहे थे, उस मामले में आदेश दिया और सर्वोच्च न्यायालय के इसी आदेश के पालनहार हाई पावर कमेटी का फैसला आया। सोरी ने पूछा है कि अजीत जोगी के जाति के मामले में राजनीतिक लड़ाई और न्यायिक लड़ाई लड़ने वाले सर्वोच्च न्यायालय में इंटरवीनर बनने वाले बृजमोहन अग्रवाल ,अजय चंद्राकर, शिवरतन शर्मा को भी अब इस जाति मामले में अपना नजरिया साफ करना चाहिए।

 

07-10-2020
अमरजीत भगत ने कहा, भाजपा शासन काल में नक्सली हिंसा चरम सीमा पर थी

अंबिकापुर। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह पर नक्सली मुद्दे को लेकर हमला बोला है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहां की उनके 15 वर्षों के शासन काल में राज्य के 3 ब्लॉक से 14 जिलों तक नक्सलवाद का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के शासन काल मे नक्सली हिंसा चरम सीमा पर थी। कई जवानों ने अपनी शहादत दी। प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने भी नक्सली हमले में अपनी जान गवां दी। बावजूद इसके रमन सिंह झीरम कांड की जांच तक नहीं करा सके। अमरजीत भगत ने दावा किया कि प्रदेश में नक्सली हिंसा में 40 प्रतिशत तक कमी आई है। बावजूद इसके प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह चिंता प्रकट कर राज्यपाल को चिट्ठी लिख रहे है। अमरजीत भगत ने पूर्व सीएम रमन सिंह और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को आत्मचिंतन करने की सलाह दी है कि 15 वर्षी में बीजेपी की सरकार ने जनता के लिये क्या किया।

 

06-10-2020
भाजपा नेता पहले ये बताएं कि वे किसानों को बोनस देने के पक्ष में हैं या नहीं : मोहन मरकाम

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि किसानों की झूठी चिंता करने से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय, पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और भाजपा नेता पहले यह बता दें कि वे किसानों को समर्थन मूल्य और बोनस देने के पक्ष में हैं या नहीं? किसानों से 20 क्विंटल धान ख़रीदी की मांग पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि इसी भाजपा ने सरकार में रहते हुए किसानों से सिर्फ़ 10 क्लिंटल धान ख़रीदने का फ़ैसला किया था। कांग्रेस के नेतृत्व में किसानों के आंदोलन के बाद ही सरकार 15 क्विंटल धान ख़रीदने के लिए बाध्य हुई थी। उन्होंने कहा है कि भाजपा ने हर साल धान का 300 रुपए बोनस देने की बात कही थी लेकिन किसानों को बोनस सिर्फ़ चुनावी साल में मिल पाया। 2100 रुपए समर्थन मूल्य दिलाने का वादा तो भाजपा कभी पूरा ही नहीं कर पाई।

मोहन मरकाम ने पूछा है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने जब केंद्र की सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार से कह दिया कि अगर किसानों को बोनस दिया गया तो केंद्र सरकार राज्य से चावल नहीं लेगी तब भाजपा के किसी नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं कहा कि बोनस दिया जाना चाहिए। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बताएं कि प्रदेश से चुनकर गए किस सांसद ने केंद्र सरकार के सामने यह बात उठाई थी कि किसानों का बोनस मिलना ही चाहिए। उन्होंने कहा है कि किसानों को धान का 2500 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ शुरु की और सुनिश्चित किया कि किसानों का नुक़सान न हो। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने तो तीन काले क़ानून बनाकर किसानों का अहित सुनिश्चित कर दिया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार की समर्थन मूल्य ख़त्म करने की साज़िश पर भाजपा नेता चुप हैं। न वे मंडियों और सहकारी समितियों को ख़त्म करने पर कुछ कह रहे हैं और न ठेका खेती शुरू करने पर कुछ कह रहे हैं।

भाजपा नेताओं के बयान को घड़ियाली आंसू बताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि भाजपा नेता पहले तय कर लें कि वे प्रदेश के किसानों के साथ खड़े हैं या नहीं फिर वे बयान दें। अगर वे प्रदेश के किसानों के हक में सोच रहे हैं तो उन्हें तीनों काले कानूनों का विरोध करना चाहिए और केंद्र सरकार से कहना चाहिए कि वह यह घोषणा करे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से कम दरों पर किसी भी कृषि उत्पाद की ख़रीदी को क़ानूनन अपराध घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि चंद उद्योगपति मित्रों के लिए कालाबाज़ारी और जमाखोरी को बढ़ावा देने वाले क़ानून बनाने वाली मोदी सरकार और भाजपा का सच किसान भली भांति समझ रहे हैं। वे जानते हैं कि कौन सी सरकार और कौन सी पार्टी किसानों के पक्ष में खड़ी है।

16-09-2020
भाजपा नेता गलत बयानी कर कोरोना का भय फैला रहे : सुशील आानंद शुक्ला

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कोरोना मामलों पर दिए गए बयान को कांग्रेस ने गैर जिम्मेदाराना और लोगों में भय पैदा करने वाला बताया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि, पिछले कुछ दिनों से भारतीय जनता पार्टी के नेता झूठे बयानों से राज्य की जनता में कोरोना के भय को और बढ़ाने का काम कर रहे हैं। भाजपा के नेता प्रायोजित ढंग से प्रदेश में कोरोना मरीजों के लिए बेड नहीं होने और राज्य में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं होने का झूठा प्रोपगेंडा कर रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि, प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह जैसे नेता भी इस प्रकार के गलत बयानों को जारी कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता शर्मनाक ढंग से राज्य में उपलब्ध ऑक्सीजन क्षमता के एक चौथाई के आंकड़ों को बयानों में जारी कर लोगों को भयभीत करने में जुटे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं की राज्य में कोरोना का संक्रमण बढ़ा है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के आधार पर सरकार ने इलाज की व्यवस्था और संसाधनों को भी बढ़ाया है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि, राज्य के हर नागरिक को बेहतर से बेहतर इलाज देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। घबराने की आवश्कता नहीं, थोड़ा भी लक्षण दिखे तो टेस्ट कराएं। नजदीकी अस्पताल में कोविड सेंटर में सम्पर्क करें, सबके इलाज की समुचित व्यवस्था है। रमन सिंह सहित भाजपा के तमाम नेता झूठे बनावटी आरोपों से प्रदेश की जनता में भय पैदा करने के बजाए सकारत्मक विपक्ष की भूमिका में आएं। रमन सिंह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, राज्य में भाजपा के और दो राष्ट्रीय पदाधिकारी हैं। 9 सांसद, एक केंद्रीय मंत्री है। यह सब केंद्र से बोलकर छत्तीसगढ़ को कोरोना से लड़ने में मदद दिलवाने की पहल क्यों नहीं करते? मुख्यमंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से एम्स में 150 आईसीयू बेड बढ़ाने की मांग की है। इस मांग का समर्थन करने का साहस ये क्यों नही दिखाते। रमन सिंह, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र से बोलकर कोरोना के इलाज को यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम और स्मार्ट कार्ड में क्यो नही शामिल करवाते। केंद्र पूरे देश मे कोरोना का इलाज मुफ्त करवाने में मदद क्यों नहीं कर रही।

01-08-2020
विभिन्न गांवों के प्रवेश द्वारों पर अब भी लगी है पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रियों की फोटो

गुंडरदेही। स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते पूर्व में सत्ता में रहे नेताओं तथा मंत्रियों की फोटो गुंडरदेही ब्लॉक के विभिन्न गांवों के प्रवेश द्वारों पर आज भी लगी दिखाई देती है। गौरतलब है कि सिकोसा के समीप ग्राम खुटेरी से अर्जुंदा की तरफ जाने वाले मार्ग पर प्रवेश द्वार पर तत्कालीन सरपंच सारिका मेहर द्वारा लगवाई गई पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह तथा पूर्व महिला बाल विकास मंत्री रमशिला साहू की फोटो लगी हुई थी किंतु प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता को लगभग डेढ़ वर्ष का समय हो जाने तथा पंचायत के एक कार्यकाल लगभग 5 वर्ष का समय बीत जाने के बावजूद भी पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रियों तथा पूर्व मुख्यमंत्री की फोटो आज तक प्रवेश द्वार में चस्पा है। बता दें कि ग्राम पंचायत के एक सरपंच का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है जबकि इस प्रवेश द्वार को बनाएं लगभग 8 वर्ष होने को हैं बावजूद ग्राम पंचायत खुटेरी की लापरवाही कहें पूर्व सरपंच द्वारा उक्त प्रवेश द्वार पर लगे तत्कालीन सरपंच सारिका मेहर की फोटो आज भी लगी हुई है। वही ग्राम सरपंच रुपेश गोरे से पूछे जाने पर उन्होंने कहा, प्रवेश द्वार पर लगी फोटो की तरफ ध्यान ही नहीं गया क्योंकि फोटो पुरानी होने की वजह से साफ दिखाई नहीं पड़ रही है। उपरोक्त मुद्दे पर चर्चा करने के लिए गुंडरदेही विधायक तथा संसदीय सचिव कुंवर सिंह निषाद से मोबाइल से बात करने का प्रयास किया गया किंतु उन्होंने मोबाइल रिसीव ही नहीं किया।

शब्बीर रिजवी की रिपोर्ट

23-06-2020
झीरम षडयंत्र की जांच की मांग पर रमन सिंह तिलमिला क्यों जाते हैं : कांग्रेस

रायपुर। झीरम में हुए राजनीतिक नरसंहार के पीछे हुए षडयंत्र की जांच की मांग पर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह एक बार फिर तिलमिला गए हैं। उनकी इस तिलमिलाहट पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि अपने शासन काल में तो रमन सिंह ने षडयंत्र की जांच करवाई नहीं और अब जब राज्य सरकार इसकी जांच करना चाहती है, तो वे तिलमिला रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इस तिलमिलाहट के पीछे कुछ तो वजह होगी। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि रमन सिंह जब यह पूछ रहे हैं कि राज्य द्वारा गठित एसआईटी क्या एनआईए और न्यायिक आयोग से बड़ी है, तो वे कांग्रेस के उस आरोप को अंदेखा कर रहे हैं।

एनआईए ने षडयंत्र की जांच की नहीं और न्यायिक आयोग की कार्यसूची में षडयंत्र की जांच है ही नहीं। शुक्ला ने पूछा है कि क्या वजह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद एनआईए की जांच की दिशा बदल गई और षडयंत्र की जांच को छोड़ दिया गया और क्यों रमन सिंह सरकार ने न्यायिक आयोग को षडयंत्र की जांच करने का जिम्मा नहीं दिया? रमन सिंह के बयान पर सवाल खड़ा करते हुए शुक्ला ने पूछा है कि यदि रमन सिंह एनआईए की तरफ़दारी कर रहे हैं तो वे बताएं कि अदालत और अपनी वेबसाइट पर जांच पूरी होने की बात कहने के बाद एनआईए अब किस बात की जांच कर रहा है? एनआईए को फिर से जांच शुरु करने की बात क्यों सूझी? सबूत पेश करने के सवाल पर उन्होंने कहा है कि जांच करने वाली एजेंसी जब मुख्य षडयंत्रकारियों का ही नाम हटा देगी, किसी से बयान ही नहीं लेगी, किसी को गिरफ़्तार ही नहीं करेगी तो सबूत किसके सामने पेश करेगी कांग्रेस? उन्होंने कहा कि रमन सिंह 15 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और वे समझते होंगे कि संवेदनशील मामलों पर सबूत सार्वजनिक तो नहीं किए जा सकते।

अगर उन्होंने केंद्र पर दबाव बनाकर सीबीआई जांच शुरु करवा दी होती तो कई षडयंत्रकारी इस समय जेल की सलाखों के पीछे होते। लेकिन वे तो दो साल जानकारी छिपाकर बैठे रहे। शुक्ला ने कहा है कि अगर रमन सिंह का दामन बेदाग है, उनका मन साफ़ है और वे सच में चाहते हैं कि सच सामने आए तो वे केंद्र सरकार से कहें कि सीबीआई जांच हो ही जाए या फिर राज्य की एसआईटी को जांच करने दिया जाए और एनआईए दस्तावेज़ एसआईटी को सौंप दे। ये सब उनसे न हो सके तो कम से कम रमन सिंह इतना तो करें कि राज्य की जांच में एनआईए के अडंगे बंद करवा दें।

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