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17-10-2020
पार्वती महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं को आय दुगुनी करने मशरूम की खेती का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया

रायपुर/सूरजपुर। कृषि विज्ञान केंद्र अजरिमा के वैज्ञानिकों की ओर से महिला समूह को प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें विकासखंड प्रतापपुर में पार्वती महिला स्वयं सहायता समूह की आय दुगुनी करने के प्रयास में मशरूम की खेती का प्रायोगिक तौर तरीकों को विस्तार पूर्वक वैज्ञानिक गण व ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अभिषेक सिंह द्वारा बताया गया। कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में महिलाओं को बताया गया कि कम लागत में गेंहूं के भूसे को बावस्तीन और फॉर्मेलिन दवाइयों को अच्छी तरह मिलाकर गर्म पानी मे उबालकर उसे सीधे तेज धूप में न सुखाकर छाया में ही अच्छी तरह निथारकर सुखाना चाहिए उसके पश्चात प्लास्टिक बैग में तीन लेयर तैयार कर मशरूम बीजो का उपयोग कर मशरूम उत्पादन कर सकते हैं। मशरूम प्रोटीन का सबसे अच्छा स्त्रोत है, इसलिये इसकी बिक्री भी ऊंचे दामों में होती है, ऐसे में महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्यों द्वारा इसका उत्पादन और बिक्री कर अपनी आय बढ़ाने का प्रयास कर सकती हैं, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के प्रयास से गांव में 5 कृषकों के यहाँ पोषण वाटिका बंनाने की कार्ययोजना तैयार की गई हैं, जिससे अन्य किसान भी उसे देखकर अपनाकर लाभ ले सकते हैं।
कलेक्टर शर्मा के नेतृत्व में ऐसे कई काम जिले में हो रहे हैं, जिससे महिला स्वयं सहायता समूह की महिलायें आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए नये-नये तरीकों को अपना रही है। इन सभी कार्यो में कृषि विज्ञान केंद्र अजरिमा के सभी वैज्ञानिक का विशेष योगदान रहा है।

11-08-2020
प्रतिरोधक क्षमता पोषण बढ़ाने में मुनगा का विशेष महत्व, सेहत के लिए खूब खाइए 

रायपुर। स्थानीय बोली में मुनगा को सहजना, सुजना, सैजन या सहजन के नाम से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। मुनगा जड़ से लेकर फूल पत्तियों और फलियों का आयुर्वेद में विस्तार से औषधीय और उपयोगी गुण बताएं है। फूल और फली दोनों का सब्जी में प्रयोग किया जाता है। मुनगा न केवल स्वादिष्ट है बल्कि पौष्टिकता से भरपूर भी है। मुनगा में आयरन, विटामिन-सी, विटामिन-ए के साथ-साथ पोषक खनिज तत्व भी पाये जाते हैं। जो शरीर को पर्याप्त उर्जा देते हैं। पत्तियों में प्रोटीन और विटामिन-बी 6, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई होता है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटेशियम और जिंक जैसे मिनरल भी होते हैं। एनीमिया को ठीक करने में भी मुनगा कारगर माना गया है। शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय रायपुर के पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ. रंजीप दास ने बताया आयुर्वेद में मुनगा की छाल, पत्ती, फूल, जड़, फल का रस और पाउडर बना कर उपयोग किया जाता है। मुनगा के विभिन्न अंगों के रस को मधुमेंह, वातघ्न, रुचिकारक, वेदनाशक, पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है। मुनगा में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन है।

मुनगा का रस सुबह-शाम पीने से उच्च रक्त चाप में लाभ मिलता है। पत्तियों के रस का सेवन करने से मोटापा भी कम होने लगता है। छाल से बने काढ़ा से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े से राहत और दर्द में आराम होता है। कोमल पत्तों का उपयोग साग बनाकर खाने से कब्ज की समस्या में लाभ होता है। सेंधा नमक और हींग के साथ जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। पत्तियां पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होती है। कैंसर और शरीर में बनी गांठ, फोड़े में मुनगा की जड़ को अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने से लाभ मिलता होता है। डॉ.दास ने कहा मुनगा साइटिका, पैरों में दर्द, जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी में काढ़ा लाभकारी है। गोंद को जोड़ों के दर्द, दमा के रोगों में लाभदायक माना जाता है। पत्तियां भी दाल और सब्जी में डाल सकते हैं। सूखी पत्तियों का चूर्ण भी नियमित रूप से सेवन करना स्वास्थ्यवर्धक होता है। मुनगा की फली को सब्जी और दाल में डालकर बना सकते हैं। इसमें पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। रोग प्रतिरोधक बढ़ाने के लिए सबसे सस्ता उपाय है। ज्यादा उम्र के लोगों को मुनगा अवश्य ही खाना चाहिए।

मुनगा में एंटी-बैक्टीरियल गुण है एवं यह कई तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार भी है। सर्दी-खांसी और बलगम से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल आयुर्वेद औषधि के रूप में होता है। इसमें मौजूद विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है। सूप खून की सफाई करने में भी मदद करता है खून साफ होने से चेहरे में भी निखार आता है। सूप पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या दूर करता हैं। दमा की शिकायत होने पर भी मुनगा का सूप फायदेमंद माना गया है। डॉ.दास ने बताया पंचकर्म चिकित्सा में निर्गुंडी पत्र, मुनगा पत्र, अरंड पत्र, धतूरा और अर्क पत्र से पत्र पिण्ड स्वदन बनाकर (पोटली बनाकर) घुटने के दर्द, जोड़ों के दर्द, गठिया बाय इत्यादि के रोगों में सिकाई लाभकारी होती है। डॉ. दास ने बताया वर्तमान में प्रदेश के स्कूलों में स्वास्थ्य सर्वे के दौरान एनीमिया पीड़ित बच्चों की पहचान होने के बाद सरकार ने कुपोषण दूर करने की पहल की है। इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन, व आयरन जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं इसलिए  इसका सेवन बच्चों को कराया जाना चाहिए ।

इसी कडी में मुनगा महाभियान शासकीय स्कूलों, छात्रावासों आंगनबाड़ी व आश्रमों के परिसर में मुनगा के दस-दस पौधे रोपे जाएंगे। बच्चों के मध्याह्न भोजन में इसकी सब्ज़ी नियमित रूप से  बनेगी ताकि बच्चों को पर्याप्त पोषण मिल सके। खासकर स्कूली बच्चों की सेहत के लिए गुणकारी व फायदेमंद सब्जी की उपलब्धता आसानी से उपलब्ध हो सके। मुनगा के फूल को पेट, कफ के रोगों में गुणकारी माना गया है। फली को वात और उदरशूल में पत्ती को नेत्ररोग, मोच, सायाटिका, गठिया में काफी गुणकारी कहा गया है। मधुमेह नियंत्रण करने में भी मुनगा खाने की सलाह डॉक्टर द्वारा जाती है।

सूप के फायदे व बनाने का तरीका :
मुनगा को छोटे टुकड़ों में काटकर, बर्तन में दो कप पानी में कम आंच पर उबलने को रखना है। चाहें तो इसमें मुनगा की पत्तियां को मिला सकते हैं। पानी जब आधा रह जाये तब फलियों को छान लें एवं बीच का गूदा निकाल लें। गूदा को उबले हुए पानी में मिलाकर थोड़ा-सा नमक और काली मिर्च भी मिलाकर सूप को सुबह-शाम पीने से अत्याधिअक लाभ होता है और शारीरिक कमजोरी भी दूर हो सकती है। सूप का नियमित रूप से सेवन करने से सेक्सुअल हेल्थ बेहतर होती है। यह महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद होता है।

05-08-2020
कलेक्टर ने रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी का निरीक्षण किया,कहा-लैब के बन जाने से आरटीपीसीआर टेस्ट में गति आएगी

राजनांदगांव। कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बुधवार को शासकीय मेडिकल कॉलेज पेण्ड्री में रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने बॉयोसेफ्टी लेवल-2 रूम, टेम्प्लेट एण्ड एडिशन रूम, मास्टर मिक्स एण्ड पीसीआर रिएजेंट प्रिप्रेशन रूम, पीसीआर रूम, पोस्ट पीसीआर रूम, कोल्ड रूम, रिकार्ड रूम, स्टॉफ रूम एवं स्टरलाईजेशन रूम तथा लॉबी का निरीक्षण किया। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि इस लैब के बन जाने से अब कोविड-19 के परीक्षण के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट में गति आएगी। उन्होंने डीन मेडिकल कॉलेज डॉ.रेणुका गहिने से लैब टेक्नीशियन एवं अन्य स्टॉफ के प्रशिक्षण के संबंध में जानकारी ली। डॉ.गहिने ने बताया कि आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए इस लैब में एक वैज्ञानिक, एक माइक्रो बॉयोलॉजिस्ट, 6 लैब टेक्नीशियन रहेंगे। उन्होंने कहा कि लेब्रोटरी में शुरूआत में आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए प्रतिदिन 250 से 300 सेम्पल का परीक्षण किया जाएगा एवं आने वाले समय में इसकी क्षमता प्रतिदिन 1000 से 1200 तक बढ़ाई जाएगी।

इस अवसर पर अधीक्षक मेडिकल कॉलेज डॉ. प्रदीप बेक उपस्थित थे। शासकीय मेडिकल कॉलेज पेण्ड्री के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के अंतर्गत कोविड-19 आरटीपीसीआर टेस्ट करने के लिए वायरल रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक लेब्रोटरी का निर्माण किया गया है। इस लैब के नोडल ऑफिसर डॉ. विजय अंबादे एवं लेब्रोटरी इंचार्ज डॉ. सिद्धार्थ पिंपलकर है। मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी भी उपस्थित थे। लेब्रोटरी में सेम्पल प्राप्त करने वाली टीम सेम्पल लेगी और बीएसएल-2 रूम में सेम्पल का सत्यापन वेरिफिकेशन टीम के द्वारा किया जाएगा। उसके बाद सेम्पल एनालिसिस एवं आरएनए एक्सट्रेक्शन टीम आरएनए का एक्सटे्रक्शन का कार्य करेगी। निकाले हुए निष्कर्षित आरएनए का मास्टर मिक्स के साथ मिक्सिंग किया जाएगा एवं अंतिम चरण में आरटीपीसीआर मशीन के माध्यम से विश्लेषण टीम उसका परीक्षण करेगी और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

07-07-2020
धान की खेती में अनावश्यक खरपतवार की रोकथाम के लिए किसानों को उपाय बताए वैज्ञानिकों ने

रायपुर/बेमेतरा। कृषि विकास और कृषक कल्याण विभाग के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के किसानों को धान की खेती में होने वाले अनावश्यक खरपतवार की रोकथाम के लिए कई उपयोगी सलाह दी है। उन्होंने कहा धान फसल के उत्पादन में वृद्धि के लिए हानिकारक कीट की रोकथाम और खरपतवारों का समय पर नियंत्रण आवश्यक है। सही समय में नियंत्रण नहीं होने से फसल की उत्पादकता प्रभावित तो होती ही है, साथ ही किसानों को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ता है।  कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि खरीफ मौसम में धान का थरहा बोने के तीन से चार दिन के भीतर प्रति हेक्टेयर में थायोबेन्कार्प निदानाशक 1.5 किलोग्राम या आक्साडायर्जिल निदानाशक 70 से 80 ग्राम का छिड़काव करना चाहिए। बोता विधि से धान बोने पर अंकुरण पूर्व खरपतवार प्रबंधन के लिए प्रेटिलाक्लोर 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से बोआई के तीन से पांच दिन के अंदर डालने पर खरपतवार नियंत्रण में फायदेमंद होता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि आक्साडायर्जिल 32 ग्राम प्रति एकड़ की दर से बोआई के तीन दिन के अंदर और पायरोजोसल्युरान 10 ग्राम प्रति एकड़ के दर से बोआई के बाद दस से बारह दिन के अंदर डालना चाहिए।

 

01-06-2020
आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक में कोरोना संक्रमण की पुष्टि

नई दिल्ली। भारतीय आयु्र्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। सूत्रों ने बताया कि इसकी जानकारी होने के बाद आईसीएमआर की पूरी इमारत को संक्रमणमुक्त किया जा रहा है। मुंबई के यह वैज्ञानिक कुछ दिन पहले दिल्ली आए थे और रविवार सुबह उनमें संक्रमण की पुष्टि हुई। यह वैज्ञानिक आईसीएमआर, मुंबई के राष्ट्रीय प्रजनन स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान से हैं। बताया जा रहा है कि आईसीएमआर इमारत को संक्रमणमुक्त किया जाएगा और दो दिनों के लिए धुएं से सफाई (फ्यूमिगेशन) होगी। वैज्ञानिक पिछले हफ्ते एक बैठक में शामिल हुए थे जिसमें आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव समेत अन्य उपस्थित थे। बताया जा रहा है कि प्रशासन की तरफ से कर्मचारियों को एक संदेश भेजकर उनसे घर से काम करने की अपील की गई है क्योंकि आईसीएमआर मुख्यालय को संक्रमण मुक्त करने का काम जारी है। संदेश में कहा गया, 'केवल कोविड-19 की मुख्य टीम आ सकती है वह भी बेहद जरूरी होने पर। अन्य को केवल घर से काम करना चाहिए।

11-05-2020
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पोखरण परमाणु परीक्षण को किया याद, देश के वैज्ञानिकों को किया सलाम

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए देश के वैज्ञानिकों को इस असाधारण उपलब्धि के लिए सलाम किया है। पीएम मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर ट्वीट कर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए वैज्ञानिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि “ राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर हमारा राष्ट्र उन सभी लोगों को सलाम करता है जो दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम आज ही के दिन वर्ष 1998 में हमारे वैज्ञानिकों द्वारा हासिल की गई असाधारण उपलब्धि को याद करते हैं। यह भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था।”

14-03-2020
कोरोना वायरस से बचाव के लिए ‘मास्क‘ के उपयोग के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया मार्गदर्शी सिद्धांत

रायपुर। राज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा नावेल कोरोना वायरस रोग (COVID-19) के संदर्भ में आमजन द्वारा ‘मास्क‘ उपयोग के संबंध में मार्गदर्शी सिद्धांत जारी किया गया है। इसके तहत आम जन द्वारा मास्क का उपयोग, आम जन मास्क उपयोग कब करें, एक मास्क का उपयोग कितनी अवधि तक प्रभावी रहेगा, मास्क के उपयोग की सही विधि एवं उपयोग किए गए मास्क का डिस्पोजल के संबंध में विस्तार से बताया गया है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शी सिद्धांत में कहा गया है कि वर्तमान में नावेल कोरोना वायरस संक्रमण (COVID-19) ने महामारी का रूप ले लिया है और अब तक विश्व के 100 से अधिक देश प्रभावित है। भारत में इस रोग के संक्रमण से 11 मार्च 2020 तक 60 से अधिक लोग प्रभावित है। इस विषाणु के संक्रमण से सामान्य बुखार एवं खांसी जैसे सामान्य लक्षण होते हैं और सिर्फ कुछ लोगों में ही यह गंभीर बीमारी का स्वरूप लेता है। यह बीमारी (COVID-19) संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से उत्पन्न छींटों के द्वारा फैलती है, जो निकट सम्पर्क (01 मीटर दूरी से कम के) वाले व्यक्ति को ही संक्रमित करती हैं। ऐसे व्यक्ति जिनमें खांसी, बुखार के कोई लक्षण नही है, उन्हें मास्क उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। स्वस्थ व्यक्ति द्वारा मास्क का उपयोग करने से उन्हें स्वास्थ्य लाभ के कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया गया है कि कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए मास्क की अपेक्षा निम्न उपाय अधिक प्रभावी होंगे- साबुन से बार-बार (कम से कम 40 सेकंड तक) हाथ धोए, अल्कोहल युक्त (70 प्रतिशत) सैनिटाइजर का उपयोग भी 20 सेकंड तक किया जा सकता है। खांसते या छींकते समय नाक व मुंह को टिश्यू पेपर या रुमाल से ढक लें, नाक, मुंह, आँख या चेहरे को छूने से बचे, भीड़़ वाले स्थानों में जाने से बचे, खांसने या छींकने वाले व्यक्ति से 1 मीटर की दूरी बनाएं रखें,अपने शरीर के तापमान की जांच नियमित रूप से करें,सर्दी,खांसी बुखार के लक्षण उत्पन्न होने पर चिकित्सक की सलाह लें। आमजन मास्क का उपयोग तभी करें जब खांसी या बुखार के लक्षण हो,जब किसी अस्पताल में जाएं,जब किसी मरीज की देखभाल करनी हो,किसी संभावित या पॉजीटिव मरीज(जिनका घर में उपचार चल रहा हो) के निकट सम्पर्क में आने वाले परिवार के लोग मास्क लगा सकते हैं। मार्गदर्शी सिद्धांत में बताया गया है कि एक मास्क यदि सही तरीके से पहना जाता है तो अधिकतम 8 घंटों तक प्रभावी रहेगा,इस बीच मास्क यदि गीला हो जाए तो तत्काल बदल लें। मास्क को नाक, मुंह एवं ठुड्डी पर सही तरीके से रखे, मास्क के नोज पीस को नोज ब्रिज पर सही तरीके से फिट करें। मास्क को बार-बार छूने से बचें,मास्क को गर्दन से लटकने नहीं दें, डिस्पोजेबल मास्क को दोबारा बिलकुल प्रयोग न करें और उपयोग के बाद तत्काल डिस्पोज कर दें। उपयोग किए गए मास्क को सामान्य ब्लीचिंग पावडर के 5 प्रतिशत घोल या एक प्रतिशत सोडियम हाईपोक्लोराइट घोल से अच्छी तरह से डिसइन्फेक्ट करने के बाद मास्क को जलाकर या गहरे गढ्ढे में मिट्टी से दबाकर डिस्पोज कर दें।

 

13-03-2020
कोरोना की पहली 3D इमेज जारी, सबसे पहले श्वसन तंत्र को करता है संक्रमित 

नई दिल्ली। कोरोनावायरस से प्रभावित फेफड़े की 3D तस्वीर जारी हुई है। यह तस्वीर रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका ने जारी की है। इस खतरनाक वायरस की काट खोजने में दुनियाभर के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। वैश्विक महामारी घोषित हो चुका कोरोनावायरस अबतक दुनियाभर में 3300 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। वहीं भारत में कोरोना के 75 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इस 3D तस्वीर में साफ दिख रहा है कि कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के फेफड़े चिकने और गाढ़ी बलगम (म्यूकस) से भर गए हैं। इस कारण पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है। बता दें कि कोरोना के वायरस मानव शरीर में सबसे पहले श्वसन तंत्र को ही संक्रमित करता है। जिसमें फेफड़े का संक्रमण पहला स्टेज है। इस 3D इमेज के बनने के बाद डॉक्टर एक्स-रे और सीटी स्कैन से ऐसे मरीजों की बहुत जल्द पहचान कर पाएंगे जो गंभीर रूप से संक्रमित है। इसके बाद उन मरीजों को तुरंत एकांत वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।
 
भारत : कोरोना वायरस हेल्पलाइन 011-23978046 बनाई :

सरकार ने केंद्रीय स्तर पर 011-23978046 फोन नंबर पर हेल्पलाइन बनाई है। इसके अलावा छत्‍तीसगढ़ शासन के 24x7 हेल्‍पलाइन नम्‍बर- 104, अथवा 0771-2235091 या 9713373165 पर भी संपर्क किया जा सकता है। 2235091 या 9713373165 पर भी संपर्क किया जा सकता है। 15 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में भी हैल्प लाइन बनाई गई है।

कोरोनावायरस से ऐसे कोशिकाएं होती हैं प्रभावित :

कोरोनावायरस मानव शरीर में घुसकर कोशिकाओं को प्रभावित करता है। जिससे कोशिकाओं के आरएनए में परिवर्तन होता है। इसके अलावा संक्रमित मरीज को सांस लेने में भी परेशानी होती है। संक्रमण का स्तर बढ़ने पर मरीज की दम घुटने से मौत हो जाती है।

कमजोर कोशिकाओं के द्वारा शरीर में घुस रहा है कोरोनावायरस:

कोरोनावायरस नाक, मुंह या आंखों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। इसके बाद ये वायरस श्वसन तंत्र के कोशिकाओं पर हमला कर एसीई 2 नाम के एक प्रोटीन का उत्पादन करता है। माना जाता है कि इस वायरस की उत्पत्ति चमगादड़ से हुई है क्योंकि इसमें भी ऐसा ही प्रोटीन पाया जाता है।

मानव कोशिका से विषक्त आरएनए को जारी करता है कोरोनावायरस :

यह वायरस अपने मेम्ब्रेन को मानव शरीर के कोशिका के मेम्ब्रेन के साथ जोड़कर संक्रमित करता है। एक बार जब मानव शरीर के कोशिका में कोरोनावायरस घुस जाता है तब यह उसके केंद्रक से एक अनुवांशिक तत्व को अलग करता है। इसे आरएनए नाम दिया गया है। आरएनए विभिन्न प्रकार के प्रोटीनों को जोड़ने का भी कार्य करता है। यह कोशिका के कोशिका द्रव्य में पाया जाता है लेकिन उसकी नाभिक के अंदर बहुत कम पाया जाता है।

07-03-2020
VIDEO: केशकाल में आयोजित हुआ विनाश विहिन विदोहन प्रशिक्षण, 25 वनमंडलों के वैद्यराज और समिति अध्यक्ष हुए शामिल

कोंडागांव। छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा केशकाल में दो दिवसीय राज्यस्तरीय विनाश विहिन विदोहन समुदाय से समुदाय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश भर के 32 वनमण्डलों में से लगभग 25 वनमण्डलों के वैद्यराज, समिति अध्यक्ष सम्मिलित हुए। दो दिवसीय विनाश विहीन विदोहन समुदाय से समुदाय प्रशिक्षण शिविर में केशकाल, धमतरी, रायपुर, बालोद, बिलासपुर, कवर्धा, कोरबा, बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर, मरवाही, कटघोरा आदि वनमंडलो से लगभग 100 की संख्या में वैद्यराज, व समिति के सदस्य उपस्थित होकर शिविर का लाभ लिया। प्रशिक्षण शिविर में पौधों के संरक्षण व उसके दोहन से भविष्य में होने वाले लाभों के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया गया, जिससे वन विभाग के साथ साथ सामाजिक रूप से भी पौधों व वनौषधियों का संरक्षण किया जा सके।

वन विभाग द्वारा आयोजित इस शिविर में मुख्य रूप से केशकाल वनमंडलाधिकारी मनिवासगन एस., उप वनमंडलाधिकारी मोना माहेश्वरी, व आर.एन. शर्मा रेंजर उपस्थित थे। शिविर के दौरान प्रशिक्षण देने के लिए रायपुर से वनस्पतिज्ञ संगीता श्रीवास्तव व बेंगलोर से वैज्ञानिक दीपा श्रीवत्स ने शिविर में आये प्रदेश भर के वैद्यराजों व समिति के अध्यक्षो को वनौषधियों के संरक्षण से संबंधित जानकारी दी गयी।

09-02-2020
कोरोना वायरस : रिसर्च में हुआ खुलासा, चमगादड़ या सांप से नहीं बल्कि इस जीव से फैला वायरस

बेंगलुरु। चीन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या करीब 772 तक पहुंच चुकी हैं । वहीं, इस विषाणु से संक्रमित होने के अब तक करीब 34,546 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हुई है। अभी तक यह माना जा रहा था कि चाइना के वुहान से फैला कोरोना वायरस चमगादड़ या सांप से मनुष्‍यों में फैला है। लेकिन चाइना के वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में किए गए शोध में कुछ और ही सच का खुलासा हुआ हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों के द्वारा की गई खोज में यह बात सामने आई है कि कोरोना वायरस सांप या चमगादड़ से नहीं बल्कि पैंगोलिन नामक वन्‍य जीव के कारण मनुष्‍यों में फैला हैं। साउथ चाइना एग्रीकल्‍चर विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर ये खुलासा किया है। विवि ने अपनी वेबसाइड पर जारी बयान में कहा कि है कोरोना वायरस पर उनके द्वारा की गई रिसर्च के अनुसार कोरोना वायरस की रोकथाम और नियंत्रण किया जा सकता है।

पैंगोलिन के जरिए मनुष्‍य में यह बीमारी आई है। बता दें चाइना के वैज्ञानिकों की रिसर्च के अनुसार कोरोना के स्ट्रेन का जीनोम,पैंगोलिन से मिले जीनोम से 99 प्रतिशत मिलता है। इस खोज में पता चला है कि कोरोना के मनुष्य में आने में वन्य जीव पैंगोलिन की भूमिका हो सकती हैं। इसी कारण पैंगोलिन के जरिए मनुष्‍य में यह बीमारी आई है। अब तक अनुमान लगाए जा रहे थे कि चमगादड़ और सांपों से कोरोना का वायरस फैला। लेकिन नवीन शोध में पुष्टि हो चुकी है कि इसका कारण पैंगोलिन हैं। चाइना की न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने भी ऐसी ही रिपोर्ट जारी कि है,जिसमें कहा गया है कि शोध के मुताबिक पैंगोलिन से इंसानों इस बीमारी के आने की आशंका सबसे अधिक है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीएस) के अनुसार, कोरोना वायरस जानवरों से मनुष्यों तक पहुंच जाता है। नया चीनी कोरोनो वायरस, सार्स वायरस की तरह है। इसके संक्रमण से बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्याएं हो जाती हैं। यह न्यूमोनिया का कारण भी बन सकता है। हांगकांग विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के वायरोलॉजिस्ट लियो पून, जिन्होंने पहले इस वायरस को डिकोड किया था, उन्हें लगता है कि यह संभवतः एक जानवर में शुरू हुआ और मनुष्यों में फैल गया। 

 

02-02-2020
गणित की लोकप्रियता बढ़ाने विभिन्न कार्यक्रम आयोजित

महासमुन्द। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् द्वारा विज्ञान एवं गणित की लोकप्रियता बढ़ाने के लिये महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. चन्द्रशेखर वेंकट रमन की जीवनी पर आधारित पहेली (गणित/विज्ञान), पोस्टर, रंगोली, भाषण, निबंध प्रतियोगिता का जिला स्तरीय आयोजन किया गया। विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर शासकीय आशीबाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महासमुन्द में कलेक्टर सुनील कुमार जैन के मार्गदर्शन में किया गया। समापन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डिप्टी कलेक्टर डॉ. नेहा कपूर थींं प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि द्वारा विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को विज्ञान एवं गणित विषय के प्रति अभिरूचि जागृत कर नये नये नवाचार प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। जिला स्तरीय प्रतियोगिता से पूर्व यह सभी प्रतियोगिताए विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर की गई। चयनित प्रतिभागी 24 जनवरी को विकासखण्ड स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिये। विकासखण्ड से चयनित 2-2 प्रतिभागियों को जिला स्तर के इस आयोजन में भाग लेने का मौका मिला।

विज्ञान परिषद् के मार्गदर्शक आरके श्रीवास्तव ने महान गणितज्ञ एवं प्रख्यात वैज्ञानिक के जीवन परिचय एवं इनके द्वारा किये गये शोध तथा गणितीय विश्लेषण संबंधी जानकारी दी  तथा हेमेन्द्र आचार्य ने रमन इफेक्ट एवं गणितीय प्रमेय संबंधी जानकारी दी।
जिला उद्यमिता विकास अंतर्गत जिला स्तरीय प्रतियोगिता भारत सरकार सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, एमएसएमई -विकास संस्थान, रायपुर द्वारा उद्योगों के प्रचार प्रसार के लिये निबंध व चित्रकारी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें जिला स्तर पर चयनित छात्र छात्राओं को प्रथम पुरस्कार 10,000,द्वितीय पुरस्कार 7500 एवं तृतीय पुरस्कार 5000 डीबीटी माध्यम से प्रदान किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम प्रभारी योगेश कुमार उपस्थित थे। विद्यालय स्तर के कक्षा 9वीं से 12वीं की विभिन्न प्रतियोगिता और महाविद्यालय स्तर में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी छात्र, छात्राओं को पुरस्कार वितरण एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। जिला स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को राज्य स्तर में प्रतिनिधित्व का मौका मिलेेगा।  

19-01-2020
छत्तीसगढ़ी कलेवा तिहार फरवरी में, व्यंजनों का होगा प्रचार

रायपुर। फरवरी माह में होने वाले छत्तीसगढ़ी कलेवा तिहार 2020 के संदर्भ में मंगलवार 21 जनवरी को दूधाधारी मठ सत्संग भवन में बैठक होगी। इस बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य नागरिक उपस्थित रहेंगे। बैठक में सभी जन-प्रतिनिधियों, समाज के मुखिया तथा गणमान्य नागरिकों से आयोजन को ऐतिहासिक तथा सफल बनाने के टिप्स लिए जाएंगे। तिहार के सामाजिक संपर्क प्रभारी माधव लाल यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में खान-पान की अति विकसित वैज्ञानिक परंपरा रही है। छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश की सरकार ने विशेष अभियान चलाया और व्यजनों का व्यापक प्रचार हुआ। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ी थाली जो अपने आप में पौष्टिकता से परिपूर्ण होने के बावजूद घर से बाहर उपलब्ध नहीं होती है। छत्तीसगढ़ राज्य की थाली को परिभाषित व प्रचारित करने के लिए छत्तीसगढ़ी कलेवा तिहार 2020 का विशेष रूप से आयोजन किया जा रहा है। आयोजन में देश-विदेश से प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है जिससे छत्तीसगढ़ में प्रचलित विविध व्यंजनों का दुनिया भर में प्रचार हो।

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