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12-08-2020
कान्हा को पसन्द है पंचामृत और माखनमिश्री, जन्माष्टमी पर लगता है छप्पनभोग

रायपुर। कान्हा के जन्मदिन को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। कान्हा के जन्मदिन पर उनको भोग लगाने के लिए उनके प्रिय व्यंजन बनाये जाते हैं। जन्माष्टमी के दि‍न बाल कान्हा को छप्पन भोग लगाए जाते हैं। साथ ही इस दिन पंचामृत और माखन-मिश्री बनाई जाती है। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को खुश करने के लिए उनका मनपसंद भोग जरूर बनाएं...

पंचामृत :
जन्‍माष्‍टमी में पंचामृत का विशेष महत्‍व है। यह ऐसा प्रसान है, जिससे कान्हा को नेहलाया जाता है और उस पंचामृत को प्रसाद की तरह लोग पीते हैं। 

ऐसे बनाये कान्हा का प्रिय पंचामृत -
एक बर्तन में दही लें और अच्‍छे से फेंट लें। फिर इसमें दूध, शहद, गंगाजन और तुलसी (सेहत के लिए तुलसी के फायदे) डालें। इसके साथ ही इसमें मखाना, गरी, चिरोंजी, किशमिश और छुआरा जैसी मेवा डालें। अंत में थोड़ा सा घी डालें। पंचामृत तैयार हो जाएगा। 

माखन-मिश्री :
कान्हा को माखन-मिश्री बहुत पसंद है। उन्हें माखन चोर के नाम से भी जाना जाता है।  

ऐसे बनाये कान्हा का प्रिय माखन-मिश्री -
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दही डालें। दही को अच्छी तरह मथ ले और उसमें से निकलने वाले मक्खन को एक अलग बर्तन में रखें। जब आप दही से मक्खन निकाल रहे हो तो धीरे-धीरे पानी डालते रहे। इससे मक्खन आसानी से निकल जाएगा। जब मक्खन निकल जाए तो दही को मथना बंद कर दें। अब मक्खन में मिश्री और बारीक कटा हुआ पिस्ता डाल दें। इस प्रकार आपका मक्खन-मिश्री का प्रसाद तैयार हो जाएगा।

11-08-2020
आयरन की कमी और इम्यून सिस्टम के लिए फायदेमंद है लेमनग्रास

रायपुर/बैकुंठपुर। लेमनग्रास दिखने में साधारण घास लगती है लेकिन यह शरीर के लिए अत्यधिक फायदेमंद है। नींबू की महक के कारण इसकी उपयोगिता बहुत बढ़ जाती है। कई औषधीय गुणों वाली यह जड़ी-बूटी एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेंटरी, एंटी-सेप्टिक और विटामिन सी से भरपूर है जो रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करती है। कलेक्टर एसएन राठौर के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत के सहयोग से कृषि विज्ञान केंद्र दवारा सामूहिक बाड़ी विकास की संकल्पना को साकार करने के लिए मनरेगा के अंतर्गत लेमन ग्रास तेल निकालने के लिए जिला प्रशासन के द्वारा आसवन संयंत्र भी स्थापित कराया गया है।

आरएस राजपूत, कृषि विज्ञानं केंद्र (केवीके) बैकुंठपुर ने बताया, “लेमन ग्रास के उत्पादन के  लिए जिले की जलवायु अनुकूल है इस कार्य में आर्युवेद विभाग से भी मदद ली जा रही है। जिले के किसानो को लॉक डाउन से उपजे आर्थिक संकट से उबारने के लिए केवीके के सहयोग से सामूहिक बाड़ियों में मनरेगा के अंतर्गत लेमन ग्रास के उत्पादन के तरीको और उसके गुणों से परिचित कराया जा रहा है।” लेमनग्रास के गुणों के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. जगतनारायण मिश्रा आयुर्वेद चिकित्साधिकारी ने बताया “नींबू की सुगंध वाली इस घास में कई पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल, पोटैशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, मैंगनीज, विटामिन बी-6, विटामिन सी, विटामिन ए आदि पाए जाते हैं।” उन्होंने बताया ,इसके प्रयोग से नर्वस सिस्टम, त्वचा और इम्यून सिस्टम के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके सेवन से टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा, कैंसर, पेट संबंधी बीमारियां, नींद न आने की बीमारी और सांस संबंधी बीमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है। नींबू की सुगंध वाली लेमनग्रास का इस्तेमाल चाय बनाने में कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल सूप बनाने में भी हो सकता है। इसका पेस्ट सब्जियों में इस्तेमाल कर सकते हैं।

लेमनग्रास के फायदे :
लेमनग्रास एनिमिया को दूर करने मे उपयोगी होता है। इसके नियमित सेवन से शरीर में आयरन की कमी को पूरा किया जा सकता है। चाय में इस्तेमाल करने पर बुखार, कफ और सर्दी में फायदा करता है। लेमनग्रास में कैंसर सहित कई बीमारियों से छुटकारा दिलाने वाले गुण होते हैं। लेमनग्रास के सेवन से वजन, बैक्टीरियल संक्रमण, पेट की सूजन, पेट फूलना, पेट में ऐंठन, अपच, कब्ज, दस्त, उल्टी और ऐंठन जैसी पाचन संबंधी समस्या,गठिया या आर्थराइटिस की समस्या में से राहत मिल सकती है। लेमनग्रास का सेवन कुछ विशेष परिस्थयों में वर्जित भी है। जैसे हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को, गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को इसका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से माहवारी शुरू हो जाती है और गर्भपात का डर रहता है। इसका सीमित मात्रा में उपयोग करें। इसके ज्यादा उपयोग से चक्कर आना, अधिक पेशाब आना, थकान आदि हो सकते हैं।

11-08-2020
प्रतिरोधक क्षमता पोषण बढ़ाने में मुनगा का विशेष महत्व, सेहत के लिए खूब खाइए 

रायपुर। स्थानीय बोली में मुनगा को सहजना, सुजना, सैजन या सहजन के नाम से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। मुनगा जड़ से लेकर फूल पत्तियों और फलियों का आयुर्वेद में विस्तार से औषधीय और उपयोगी गुण बताएं है। फूल और फली दोनों का सब्जी में प्रयोग किया जाता है। मुनगा न केवल स्वादिष्ट है बल्कि पौष्टिकता से भरपूर भी है। मुनगा में आयरन, विटामिन-सी, विटामिन-ए के साथ-साथ पोषक खनिज तत्व भी पाये जाते हैं। जो शरीर को पर्याप्त उर्जा देते हैं। पत्तियों में प्रोटीन और विटामिन-बी 6, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई होता है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटेशियम और जिंक जैसे मिनरल भी होते हैं। एनीमिया को ठीक करने में भी मुनगा कारगर माना गया है। शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय रायपुर के पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ. रंजीप दास ने बताया आयुर्वेद में मुनगा की छाल, पत्ती, फूल, जड़, फल का रस और पाउडर बना कर उपयोग किया जाता है। मुनगा के विभिन्न अंगों के रस को मधुमेंह, वातघ्न, रुचिकारक, वेदनाशक, पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है। मुनगा में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन है।

मुनगा का रस सुबह-शाम पीने से उच्च रक्त चाप में लाभ मिलता है। पत्तियों के रस का सेवन करने से मोटापा भी कम होने लगता है। छाल से बने काढ़ा से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े से राहत और दर्द में आराम होता है। कोमल पत्तों का उपयोग साग बनाकर खाने से कब्ज की समस्या में लाभ होता है। सेंधा नमक और हींग के साथ जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। पत्तियां पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होती है। कैंसर और शरीर में बनी गांठ, फोड़े में मुनगा की जड़ को अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने से लाभ मिलता होता है। डॉ.दास ने कहा मुनगा साइटिका, पैरों में दर्द, जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी में काढ़ा लाभकारी है। गोंद को जोड़ों के दर्द, दमा के रोगों में लाभदायक माना जाता है। पत्तियां भी दाल और सब्जी में डाल सकते हैं। सूखी पत्तियों का चूर्ण भी नियमित रूप से सेवन करना स्वास्थ्यवर्धक होता है। मुनगा की फली को सब्जी और दाल में डालकर बना सकते हैं। इसमें पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। रोग प्रतिरोधक बढ़ाने के लिए सबसे सस्ता उपाय है। ज्यादा उम्र के लोगों को मुनगा अवश्य ही खाना चाहिए।

मुनगा में एंटी-बैक्टीरियल गुण है एवं यह कई तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार भी है। सर्दी-खांसी और बलगम से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल आयुर्वेद औषधि के रूप में होता है। इसमें मौजूद विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है। सूप खून की सफाई करने में भी मदद करता है खून साफ होने से चेहरे में भी निखार आता है। सूप पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या दूर करता हैं। दमा की शिकायत होने पर भी मुनगा का सूप फायदेमंद माना गया है। डॉ.दास ने बताया पंचकर्म चिकित्सा में निर्गुंडी पत्र, मुनगा पत्र, अरंड पत्र, धतूरा और अर्क पत्र से पत्र पिण्ड स्वदन बनाकर (पोटली बनाकर) घुटने के दर्द, जोड़ों के दर्द, गठिया बाय इत्यादि के रोगों में सिकाई लाभकारी होती है। डॉ. दास ने बताया वर्तमान में प्रदेश के स्कूलों में स्वास्थ्य सर्वे के दौरान एनीमिया पीड़ित बच्चों की पहचान होने के बाद सरकार ने कुपोषण दूर करने की पहल की है। इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन, व आयरन जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं इसलिए  इसका सेवन बच्चों को कराया जाना चाहिए ।

इसी कडी में मुनगा महाभियान शासकीय स्कूलों, छात्रावासों आंगनबाड़ी व आश्रमों के परिसर में मुनगा के दस-दस पौधे रोपे जाएंगे। बच्चों के मध्याह्न भोजन में इसकी सब्ज़ी नियमित रूप से  बनेगी ताकि बच्चों को पर्याप्त पोषण मिल सके। खासकर स्कूली बच्चों की सेहत के लिए गुणकारी व फायदेमंद सब्जी की उपलब्धता आसानी से उपलब्ध हो सके। मुनगा के फूल को पेट, कफ के रोगों में गुणकारी माना गया है। फली को वात और उदरशूल में पत्ती को नेत्ररोग, मोच, सायाटिका, गठिया में काफी गुणकारी कहा गया है। मधुमेह नियंत्रण करने में भी मुनगा खाने की सलाह डॉक्टर द्वारा जाती है।

सूप के फायदे व बनाने का तरीका :
मुनगा को छोटे टुकड़ों में काटकर, बर्तन में दो कप पानी में कम आंच पर उबलने को रखना है। चाहें तो इसमें मुनगा की पत्तियां को मिला सकते हैं। पानी जब आधा रह जाये तब फलियों को छान लें एवं बीच का गूदा निकाल लें। गूदा को उबले हुए पानी में मिलाकर थोड़ा-सा नमक और काली मिर्च भी मिलाकर सूप को सुबह-शाम पीने से अत्याधिअक लाभ होता है और शारीरिक कमजोरी भी दूर हो सकती है। सूप का नियमित रूप से सेवन करने से सेक्सुअल हेल्थ बेहतर होती है। यह महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद होता है।

10-08-2020
जन्‍माष्‍टमी के व्रत में बहुत महत्व होता है धनिए की पंजीरी का

रायपुर। भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में जन्‍माष्‍टमी को बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी के दिन प्रसाद में धनिया की पंजीरी बनाई जाती है। धनिया पंजीरी इस अवसर पर खास प्रसाद होता है। धनिए की पंजीरी का जन्माष्टमी के व्रत में बहुत बड़ा महत्व होता है। यह प्रसाद खाने में तो स्वादिष्ट होता ही है, साथ ही सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। जानिए कैसे बनाई जाती है धनिया की पंजीरी।

धनिया की पंजीरी बनाने की विधि :
जन्माष्टमी में प्रसाद के रूप में धनिये की पंजीरी बनाई जाती है। धनिए की पंजीरी बनाने के लिए सबसे पहले कढ़ाई में 1 चम्मच घी गर्म कर लें। अब इसमें धनिया पाउडर मिलाकर अच्छी तरह से भून लें। जब हल्की सोंधी सी महक उठने लगे तो आंच बंद कर दे। अब मखाने को छोटा-छोटा काट ले, इसे दूसरी कढ़ाई में घी डालकर तल लें। इस मखाने को दरदरा पीस ले। अब इसे धनिया पंजीरी में मिला ले। काजू और बादाम को भी छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर साथ मिला दें। इस तरह से भगवान को भोग लगाने वाली धनिए की पंजीरी तैयार है। भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर लीजिये।

06-08-2020
पेट की चर्बी घटाने, पाचन क्रिया में सुधार और भूख घटाने के लिए करें इस ​ड्रिंक का उपयोग...

रायपुर। आज के समय में बिजी लाइफस्टाइल के कारण सही तरीके से खाना ना खाने के कारण हमारे शरीर का सिस्टम बिगड़ जाता है, जिससे हमारे पेट के आस पास चर्बी इकट्ठी होने लगती है। चर्बी को कम करने के लिए लोग कई तरह के घरेलू नुस्खे भी अपनाते हैं। लेकिन उसका कारगर परिणाम देखने को नहीं मिलता है।

हाल ही में एक स्टडी में पाया गया है कि एप्पल साइडर विनेगर से वजन में काफी तेजी से कम होता है। यह शरीर की बढ़ती चर्बी को खत्‍म करने में हमारी मदद करता है। एप्‍पल साइडर विनेगर में मौजूद घटक मेटाबॉलिज्‍म बेहतर करने में हमारी मदद करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को सुधार में हमारी मदद करता है। इसके साथ ही यह वायरल संक्रमण से लड़ने में हमारी मदद करता है और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। साथ ही यह भूख लगने से हमें बचाता है। ऐसे में बेकिंग सोडा के साथ इसका सेवन किया जाए तो वजन में तेजी से कमी आती है।

ऐसे बनाएं ड्रिंक: 
एक गिलास में एक चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। गिलास में पानी डालें और इसका सेवन करें। इस ड्रिंक में कई तरह के पोषक तत्व और एंजाइम मौजूद होते हैं जो पाचन क्रिया को सुधारते हैं। इसके अलावा यह पेय पदार्थ भूख घटाता है, जिससे वजन कम होने में मदद मिलती है।

23-07-2020
बच्चों पर पड़ रहा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का असर, माता-पिता बच्चों के साथ व्यवहार में लाए बदलाव  

रायपुर। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल में स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन जारी है। अब बच्चें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जैसे कि मोबाइल और लैपटॉप पर अपना ज्यादातर समय बिता रहे हैं, जिसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। माता-पिता की चिंताए भी अपने बच्चें के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ गई है। स्मार्टफोन और लैपटॉप पर लगातार पढ़ते रहने से बच्चों के कंधों, पीठ और आंखों में दर्द हो रहे हैं। वहीं बच्चों के रूटीन में भी काफी बदलाव हो गया है। यही कारण है कि बच्चे अब माता-पिता के साथ अपना समय नहीं बिता रहे हैं।

माता-पिता के रोकने पर बच्चों में चिड़चिड़ापन देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों की माने तो अब कोरोना संक्रमण काल में माता-पिता को बच्चों के प्रति व्यवहार में बदलाव करना बेहद जरूरी है। अपने बच्चों को किसी और एक्टिविटी में भी लगाना होगा। खेलों के प्रति अपने बच्चों को प्रेरित करे जैसे साइकिल चलाना, कैरम बोर्ड खेलना, चेस खेलना अन्य खेल। बच्चों के मन में निगेटिविटी न आए और आप जो चाहे वह उनसे आसानी से करवा सके इसके लिए आप उनके साथ घर पर ही लुकाछिपी व अन्य खेले जो आप अपने बचपन में खेलते थे। वे सभी खेल बच्चों के साथ खेले जिससे आपकी एक्सरसाईज भी हो जाएगी और आनंद भी ले सकेंगे। माता-पिता को यह भी सोचना होगा कि बच्चों के पीछे ज्यादा न पड़ें, वरना बच्चे फिर चिढ़ने लगेंगे। इसलिए माता-पिता को अपने व्यवहार में बदलाव करना होगा।

21-07-2020
हेल्थ स्पेशल : खाली पेट चाय पीना पड़ सकता है महंगा...

रायपुर। खाली पेट सुबह चाय पीने से बचना चाहिए। चाय में कई तरह के ऐसिड होते हैं। खाली पेट चाय पी कर आप अपने पेट को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं। इससे अल्‍सर या गैस जैसी परेशानियां बढ़ने की संभावना रहती है। लोगों का मानना है कि सुबह के समय चाय पीने से शरीर में चुस्ती आ जाती है लेकिन यह बात गलत है। खाली पेट चाय का सेवन करने से सारा दिन थकान और स्वभाव में चिड़चिड़ापन बना रहता है। इसलिए खाली पेट चाय पीने का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दे।

19-07-2020
हेल्थ स्पेशल : बादाम के पाउडर से बच्चों की त्वचा नरम और मुलायम होती है साथ ही ​इम्‍यून सिस्‍टम भी मजबूत

रायपुर। बादाम खाने के बेहद फायदे हैं। बादाम हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसका ग्लाईसेमिक लोड शून्य होता है। इसमें कार्बोहाईड्रेट बहुत कम होता है। यह पाचन में सहायक होता है और हृदय रोगों से बचने में भी सहायक रहता है। इतना ही नहीं पेट को अधिक देर तक भर कर रखता है। कब्ज के रोगियों के लिये बादाम बहुत ज्यादा लाभदायक है। बादाम में सोडियम नहीं होने से उच्च रक्तचाप रोगियों के लिये भी लाभदायक होता है। इसमें पोटैशियम, विटामिन ई, लौह, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फास्फोरस भी होते हैं। बड़ों के साथ बच्चों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। लेकिन बच्चे इसका सेवन आसानी से नहीं कर पाते। ऐसे में बच्चों को बादाम का पाउडर बनाकर खिलाना फायदेमंद होता है। बच्चों की सेहत के लिए बादाम के पाउडर को शामिल करना काफी जरूरी होता है। 
 

घर पर ही बनाएं बादाम का पाउडर : 
चीनी, इलायची पाउडर, केसर और पानी ले लें। उसके बाद बादाम को उबाल लें। पानी ठंडा होने के बाद बादाम को निकाल लें और साफ पानी से धो लें। इसके बाद बादाम का छिलका निकाल लें और इन्हें सूखने के लिए रख दें। बादाम सूखने के बाद इन्हें पैन में भून लें। अब भूने हुए बादाम, चीनी, इलायची पाउडर और केसर को पीसकर पाउडर बना लें। इसके बाद एक एयर टाइट कंटेनर में बंद करके रख दें।

बादाम के पाउडर के फायदे :
बादाम में अनेक पोषक तत्‍व होते हैं जैसे कि विटामिन ई। यह पोषक तत्‍व शिशु की त्‍वचा को नरम और मुलायम बनाता है। बादाम खाने से शिशु का इम्‍यून सिस्‍टम भी मजबूत होता है। यह शिशु और बच्‍चों के मस्तिष्‍क के विकास में भी मदद करता है। बादाम के पाउडर से बच्‍चों की हड्डियों को भी मजबूती मिलती है। बच्चों को 9 महीने के बाद ही बादाम पाउडर खिलाना शुरू करना चाहिए। जब आप बच्चों को बादाम पाउडर खिलाना शुरू करेंगे तो शुरुआत में कम मात्रा में ही उन्हें बादाम पाउडर खिलाएं। बच्चों को बादाम पाउडर खिलाने से विटामिन ई की कमी को पूरा किया जा सकता है।

18-07-2020
मानसून में चिपचिपे बालों से है परेशान, तो इस तरह रखे ध्यान  

रायपुर। मानसून के मौसम में बाल चिपचिपे या तैलीय हो जाते हैं। मौसम के बदलने से बालों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता हैं। बालों के चिपचिपेपन या तैलीय हो जाने से कही बहार जाने में बहुत परशानी होती है। मानसून में बाल जल्दी गंदे और तैलीय हो जाते हैं। अगर मानसून में आप बालों का ध्यान रखना चाहते हैं। तैलीय बालों की देखभाल के कुछ टिप्स जिन्हें अपनाकर आप बालों के चिपचिपेपन से राहत पा सकते हैं। 

बारिश में न भीगे : 

बरसात का पानी बालों के लिए बहुत ख़राब होता है। अगर आप गलती से भीग भी गए तो घर आते ही तुरंत अपने बालों को शैम्पू करें।

तैलीय बालों को नियमित रूप से धोये :

अपने सिर के बाल नियमित रूप से धोइए। बालों को धोने के लिए अच्छे शैम्पू का प्रयोग करें। 

तैलीय बालों को सप्ताह में तीन बार बालों को धोएं :

ऑयली हेयर को सप्ताह में कम से कम तीन बार अवश्य धोना चाहिए जिससे बाल साफ रहते हैं और तैलीय कम होती है। 

तैलीय बालों को बांध कर न रखे :

अपने बालों को कभी कभी खुला भी रखिये। हमेशा बांधने से आयल एक जगह इकठा हो जाता है, जिससे बाल तैलीय लगते हैं।

कंघी की सफाई हमेशा करें :

बालों की साफ-सफाई का ध्यान रखते तो आप रखते ही है, पर कंघी को साफ करना भूल जाते हैं जो कि सबसे जरुरी बात है। हर हफ्ते बालों में इस्तेमाल करने वाली कंघी को साफ करना जरुरी है। रोज इस्तेमाल करने वाली कंघी को कुछ देर धूप में रखें और अगर लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करें तो वो बहुत अच्छी बात है।

तैलीय बालों के लिए विटामिन सी और मिनरल्स जरुरी होती है :  

विटामिन सी और मिनरल्स से भरपूर होने के कारण, नींबू का रस सिर की त्वचा में अतिरिक्त चिपचिपेपन को सोखता है। यह ज़्यादा तेल के उत्पादन को रोकता है। इसीलिए, ऑयली हेयर वालों को नींबू का रस बालों में लगाना चाहिए। सादे पानी में नींबू का रस मिक्स करें। इसे,  सिर की त्वचा पर 5-10 मिनट के लिए लगाकर रखें। फिर, हल्के गुनेगुने पानी से बालों को शैम्पू करें।

10-07-2020
मानसून में खान-पान का रखें विशेष ध्यान, क्या खाएं और क्या न खाएं

रायपुर। वैश्विक महामारी कोरोना से पूरा देश जूझ रहा है। वहीं मानसून के साथ मौसमी बीमारियों को आमंत्रण मिल चुका है। बता दें कि बारिश के मौसम में ज्यादातर बीमारियां हमारे खान-पान के कारण होती हैं। सामान्य फ्लू, बुखार, बैक्टीरियल, वायरल और फंगस से युक्त भोजन हमें बीमार करते हैं। इस मौसम में फैलने वाली बीमारियों से खुद को बचाने के लिए आप अपने खान-पान में थोड़ा बदलाव करें। बारिश के मौसम में खुद को फिट रखना है या परिवार के लोगों की सेहत का ध्यान रखना है तो भोजन में दाल, सब्जियां, कम वसा वाली चीजें ज्यादा शामिल करें। प्रोटीन के अलावा बीटा कैरोटीन, बी काम्प्लेक्स विटामिन, विटामिन सी, ई, सेलेनियम, जिंक, फॉलिक एसिड, आयरन, कापर, मैग्नीशियम, प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक आहार भी शरीर के लिए अच्छे होते हैं। इस दौरान अपने खान-पान में इन सावधानियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

गर्मागर्म सूप और मसाले वाली चाय का करे सेवन : 
बारिश के बाद शरीर को ठंडक से बचाने के लिए अदरक की लच्छों के साथ सूप का आनंद ले सकते हैं। यह ठंड से ही नहीं फ्लू से भी आपको बचाता है। साथ ही शरीर को थकान और टूटन से बचाने में मदद करता है। उन लोगों के लिए यह अच्छा आहार है जो बरसात के दिनों में मेहनत नहीं कर पाते हैं। गले के संक्रमण में एक कटोरी सूप अच्छा आराम पहुंचाता है। साथ ही आपका पेट भी भर जाता है।

एक कप गर्म कड़क चाय या मसाला चाय का कोई जवाब नहीं : 
बरसात के दिनों में यह उपयुक्त पेय है। वही लॉन्ग और दालचीनी वाली मसाला चाय पीने से गले के संक्रमण और जुकाम से बचा जा सकता है। बारिश के दौरान प्याज और अदरक का सेवन ज्यादा करना चाहिए भोजन में रेशेदार फलों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। नींबू में विटामिन सी मिलता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वहीं पुदीना पाचन तंत्र को मजबूत करता है। इसलिए इसे खाने में शामिल करना चाहिए। इसे चटनी और सलाद में प्रयोग करना चाहिए। बारिश के मौसम में पीने के पानी का खास ध्यान रखना चाहिए। हरी सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इसमें फंगस और बैक्टीरिया से ज्यादा पनपते हैं।

घर में बने पकौड़े ही खाए :
बारिश के दौरान हर कोई पकौड़े खाना पसंद करता है। हल्की फुहारों के साथ एक कप गर्म चाय और एक प्लेट पकोड़े का अलग ही आनंद हैं। प्याज पकोड़ा, पालक पकोड़ा, पनीर पकोड़ा, हरी मिर्च का पकोड़ा आदि बनाए जा सकते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि बारिश के दौरान बाहर के पकोड़े ना खाकर घर में बने पकोड़े खाए।

10-05-2020
मई महीने के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है मदर्स डे, आईए जानते है...

नई दिल्ली। मई महीने में दूसरे हफ्ते के रविवार को मदर्स डे के तौर पर मनाया जाता है। मां के लिए कोई एक दिन नहीं होता है, वो अलग बात है कि एक खास दिन को मां के नाम निश्चित कर दिया गया है। इस वर्ष ये खास दिन 10 मई यानी आज मनाया जा रहा है। अपनी हर तकलीफें एक तरफ कर बच्चों की हर खुशी का ध्यान रखने वाली मां के साथ इस खास दिन को बिताना चाहिए। मदर्स डे लोगों को अपनी भावनाओं को जाहिर करने का मौका देता है। ज्यादातर देशों में मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। लेकिन कई देशों में इस खास डे को अलग-अलग तारीखों पर भी मनाया जाता है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि इस खास दिन की शुरुआत कैसे हुई?

ऐसे हुई मदर्स डे की शुरुआत :

मदर्स डे को लेकर कई मान्यताएं हैं। कुछ का मानना है कि मदर्स डे के इस खास दिन की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। वर्जिनिया में एना जार्विस नाम की महिला ने मदर्स डे की शुरुआत की। कहा जाता है कि एना अपनी मां से बहुत प्यार करती थी और उनसे बहुत प्रेरित थी। उन्होंने कभी शादी नहीं की और मां का निधन हो जाने के बाद उनके प्रति सम्मान दिखाने के लिए इस खास दिन की शुरुआत की। ईसाई समुदाय के लोग इस दिन को वर्जिन मेरी का दिन मानते हैं। यूरोप और ब्रिटेन में मदरिंग संडे भी मनाया जाता है। मां का सभी के जीवन में योगदान अतुलनीय है। फिर चाहे उसे ऑफिस और घर दोनों जगह में संतुलन क्यों ना बैठना पड़ा हो, मां ने कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा है। 9 मई 1914 को अमेरिकी प्रेसिडेंट वुड्रो विल्सन ने एक कानून पारित किया था। इस कानून में लिखा था कि मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा। इसी के बाद से भारत समेत कई देशों में ये खास दिन मई के दूसरे रविवार को मनाया जाने लगा। तो इस मदर्स डे के खास मौके पर अपनी मां के साथ समय बिताएं, वो सब करें जो व्यस्त होने के कारण आप नहीं कर पाते और मां को खास तोहफे देकर जरूर खुश करें।

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