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कमिश्नर ने कलेक्टरों से कहा- मिल रही कई शिकायतें,इलाज के नाम पर अधिक वसूली होने पर पीड़ित परिवार को राशि वापस दिलाएं 

रविशंकर शर्मा  | 16 Sep , 2020 01:29 PM
कमिश्नर ने कलेक्टरों से कहा- मिल रही कई शिकायतें,इलाज के नाम पर अधिक वसूली होने पर पीड़ित परिवार को राशि वापस दिलाएं 

रायपुर। कमिश्नर रायपुर जीआर चुरेंद्र ने संभाग के सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि, जिला, विकासखंड और अन्य स्तर पर जो भी निजी अस्पताल संचालित है, उनसे सेवा भावना के साथ इलाज का न्यूनतम चार्ज लिए जाने के लिए प्रेरित करें। समुचित कार्यवाही करें, जिससे आम जनता व कोविड बीमारी से पीड़ित परिवारों को राहत मिले। कमिश्नर ने अपने पत्र में ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा है कि, जनता व प्रतिनिधियों की ओर से यह शिकायत आ रही है कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान निजी अस्पतालों में भी मरीजों का इलाज हो रहा है,लेकिन कोविड टेस्ट के नाम पर विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के त्वरित इलाज में विलंब हो रहा,इससे कई बार गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों का निधन भी हो जाता है। निजी अस्पताल संचालकों की ओर से समुचित प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव में विभिन्न प्रकार के बीमारियों और कोविड के इलाज के नाम पर बड़ी राशि वसूलने की  शिकायत भी आ रही है।

कमिश्नर ने पत्र में कहा है कि, जिले के अंतर्गत जिन निजी अस्पतालों में कोविड -19 के मरीजों को उपचार करने की सुविधा दी गई है, ऐसे सभी अस्पतालों का सूचीकरण, उनकी ओर से मरीजों के किए जा रहे उपचार या लिए जा रहे उपचार राशि की जानकारी प्रतिदिन लेने की व्यवस्था बनाई जाए। मरीजों के परिवार से भी संपर्क कर इसकी पुष्टि की जाए। यदि कोविड 19 के बीमारी के इलाज के नाम पर अधिक राशि का वसूली की जानकारी प्राप्त होती है, तो वह राशि मरीज के परिवार को वापस कराई जाए। कश्मिर ने कहा है कि, सेवानिवृत्त हो चुके पेंशनधारी ,वरिष्ठ नागरिकों को भी सस्ता - सुलभ इलाज निजी या शासकीय अस्पतालों से कराए जाने की व्यवस्था करें। इसके लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में निजी अस्पताल के संचालकों की प्रथम बैठक भी आयोजित करने को कहा है। इससे औचित्यपूर्ण दर पर निजी अस्पतालों से मरीजों की उपचार की व्यवस्था बनाई जाए। कमिश्नर ने कहा है कि, इसके लिए बनाई गई व्यवस्था को क्रियान्वित करने के दृष्टि से जिले स्तर पर एक टीम गठित किया जए, जिसका अध्यक्ष अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी या मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को रखा जाए। उन्होंने कहा है कि, यह समिति समय -समय पर निजी अस्पतालों में मरीजों के उपचार गतिविधियों का आकलन करने निरीक्षण करेंगें, साथ ही निजी अस्पतालों के संचालकों की आवश्यकतानुसार मासिक बैठक लेकर समीक्षा करेंगें। मरीजों का औचित्यपूर्ण दर पर इलाज की व्यवस्था बनाएंगे। इसी तरह की समिति विकासखंड मुख्यालय या अन्य नगरीय क्षेत्र के लिए भी गठित कराकर कार्य कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

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